ईरान पर हमलों के बाद अमेरिका एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष में उलझ गया है। इस युद्ध में केवल जानमाल का नुकसान ही नहीं, बल्कि भारी आर्थिक लागत भी सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार हमले के पहले 24 घंटों में ही अमेरिका ने करीब 779 मिलियन डॉलर खर्च कर दिए। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 6,900 करोड़ रुपये के बराबर बताई जा रही है। युद्ध की शुरुआत के साथ ही सैन्य कार्रवाई, हथियारों के इस्तेमाल और सैनिक तैयारियों पर तेजी से खर्च बढ़ गया है।
ट्रंप ने दिए लंबे युद्ध के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह युद्ध कुछ दिनों में खत्म होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि शुरुआती अनुमान के अनुसार यह संघर्ष लगभग चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास इससे ज्यादा समय तक युद्ध जारी रखने की क्षमता मौजूद है। ट्रंप के बयान से यह साफ है कि अगर हालात नहीं बदले तो यह सैन्य संघर्ष लंबा खिंच सकता है।
कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पर रोजाना करोड़ों का खर्च
मध्य-पूर्व में सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए अमेरिका ने अपने सबसे शक्तिशाली नौसैनिक समूहों को तैनात किया है। इनमें दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड भी शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के संचालन पर ही रोजाना करीब 65 लाख डॉलर यानी लगभग 58 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए ऐसे दो बड़े कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट में तैनात किए हैं, जिससे सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है।
युद्ध की तैयारी में भी भारी खर्च
ईरान पर हमले से पहले अमेरिका ने बड़े स्तर पर सैन्य तैयारियां की थीं। इसमें लड़ाकू विमानों की तैनाती, नौसैनिक जहाजों की तैयारी और क्षेत्रीय संसाधनों को जुटाना शामिल था। इन तैयारियों पर ही करीब 630 मिलियन डॉलर यानी लगभग 5,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इससे पता चलता है कि युद्ध शुरू होने से पहले ही अमेरिका को बड़ी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ी।
लंबा चला युद्ध तो खर्च होगा लाखों करोड़
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबे समय तक चलता है तो इसकी लागत बेहद बड़ी हो सकती है। बजट विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में अमेरिका को करीब 210 अरब डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 18.87 लाख करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। यह आंकड़ा बताता है कि लंबा युद्ध अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
पहले से ही बढ़ रहा है सैन्य खर्च
मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्षों के कारण अमेरिका का सैन्य खर्च पहले ही काफी बढ़ चुका है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले के बाद अमेरिका ने इजरायल को लगभग 21.7 अरब डॉलर की सैन्य सहायता दी थी। इसके अलावा यमन, ईरान और अन्य क्षेत्रों में चल रहे अभियानों पर भी अरबों डॉलर खर्च किए गए हैं। इन सभी खर्चों को जोड़ने पर कुल राशि 31 अरब डॉलर से ज्यादा बताई जा रही है।
कितने समय तक चलेगा संघर्ष?
जब राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा गया कि यह युद्ध कब तक चलेगा, तो उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास लंबे समय तक लड़ने की क्षमता है। उनका कहना था कि अगर जरूरत पड़ी तो यह अभियान तय समय से ज्यादा भी चल सकता है।
