इन दिनों हंता वायरस को लेकर दुनियाभर में चर्चा तेज हो गई है। लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह वायरस भी कोरोना की तरह तेजी से फैल सकता है और क्या दुनिया फिर किसी नई महामारी की तरफ बढ़ रही है। यह मामला डच लग्जरी क्रूज शिप MV Hondius से जुड़ा है, जहां कई यात्री बीमार पड़े और तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
क्या है हंता वायरस?
हंता वायरस एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक संक्रमण माना जाता है। यह आमतौर पर संक्रमित चूहों के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बंद और गंदी जगहों में वायरस का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जिनमें बुखार, शरीर दर्द, थकान और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं। गंभीर मामलों में फेफड़ों और किडनी पर असर पड़ सकता है।
WHO ने क्या कहा?
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने साफ कहा है कि हंता वायरस की तुलना कोरोना वायरस से नहीं करनी चाहिए। WHO की एक्सपर्ट डॉ. मारिया वैन केरखोव ने कहा कि यह SARS-CoV-2 जैसा वायरस नहीं है और यह उसी तरह तेजी से नहीं फैलता। अधिकतर हंता वायरस इंसान से इंसान में फैलते ही नहीं हैं।
एंडीज स्ट्रेन को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में एंडीज स्ट्रेन का शक जताया जा रहा है। यह हंता वायरस का दुर्लभ प्रकार है, जिसमें सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की क्षमता होती है। हालांकि इसके लिए लंबे और बेहद करीबी संपर्क की जरूरत होती है। WHO ने फिलहाल वैश्विक खतरे को कम बताया है लेकिन कई देशों में यात्रियों की निगरानी शुरू कर दी गई है।
छह हफ्ते तक रह सकता है असर
WHO के मुताबिक हंता वायरस की इन्क्यूबेशन अवधि छह हफ्ते तक हो सकती है। यानी संक्रमण होने के काफी समय बाद भी लक्षण सामने आ सकते हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां क्रूज शिप से जुड़े यात्रियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है।
