पंजाब में इस मानसून सीजन बारिश का इंतजार लगातार लंबा होता गया है। 1 जून से अगस्त के अंत तक राज्य में सामान्य से करीब 36 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। बारिश की कमी का असर खेती, जलस्तर और आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पंजाब में मानसून कमजोर रहने के पीछे कई मौसमी परिस्थितियां एक साथ जिम्मेदार हैं।
El Niño ने बदला मानसून का मिजाज
मानसून की कमजोरी की प्रमुख वजहों में El Niño को माना जा रहा है। यह प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से बनने वाली जलवायु स्थिति है। इसका असर वैश्विक मौसम पर पड़ता है और भारत में मानसूनी हवाओं की ताकत तथा नमी के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। इस साल El Niño की स्थिति मानसून के लिए चुनौती बनी हुई है।
मानसून ट्रफ ने बदली दिशा
पंजाब के मौसम पर Monsoon Trough की स्थिति का खास असर पड़ता है। इस बार यह कई मौकों पर अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की तरफ खिसकी। ऐसे में बारिश वाले सिस्टम पंजाब के मैदानी इलाकों के बजाय हिमालय की तलहटी के करीब ज्यादा सक्रिय रहे। नतीजा यह हुआ कि पंजाब के कई हिस्सों में बादल तो पहुंचे, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हुई।
MJO की कमजोर गतिविधि भी कारण
मौसम वैज्ञानिक Madden-Julian Oscillation (MJO) को भी मानसून की सक्रियता से जोड़ते हैं। इसकी कमजोर स्थिति से मानसूनी हवाओं में उतार-चढ़ाव आ सकता है और बारिश के बीच लंबे अंतराल बन सकते हैं। पंजाब में भी ऐसे कई दौर देखने को मिले जब कुछ दिनों तक बारिश लगभग न के बराबर रही।
सितंबर से उम्मीद, लेकिन तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं
अब मानसून के अंतिम चरण यानी सितंबर पर नजर है। मौसम विभाग ने देशभर में सितंबर की बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान दिया है, हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश की संभावना भी जताई गई है। पंजाब के लिए स्थानीय मौसम प्रणालियां आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
