प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की अपनी दो दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद शनिवार को चीन का रुख किया। वे वहां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस यात्रा के दौरान भारत और जापान के बीच 13 बड़े समझौते हुए और कई रणनीतिक साझेदारियों की घोषणा की गई, जिससे द्विपक्षीय रिश्तों को नई मजबूती मिली।
मोदी ने जताया आभार, यात्रा को बताया ऐतिहासिक
जापान यात्रा पूरी होने पर पीएम मोदी ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर लिखा – “इस यात्रा को उन सकारात्मक और फलदायी नतीजों के लिए याद रखा जाएगा जो दोनों देशों के लोगों के लिए लाभकारी साबित होंगे। मैं जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा, जापानी सरकार और जनता का हार्दिक धन्यवाद करता हूं।”
सेंदाई में सैमीकंडक्टर प्लांट का दौरा
चीन रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने जापान के मियागी प्रीफेक्चर के सेंदाई में स्थित सेमीकंडक्टर प्लांट का दौरा किया। यहां उन्होंने अपने जापानी समकक्ष शिगेरू इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन से पहुंचकर अत्याधुनिक तकनीक का जायज़ा लिया। इस दौरे ने भारत के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और जापान की तकनीकी क्षमता के बीच सहयोग की अपार संभावनाओं को उजागर किया।
भारतीय उद्योग के लिए बड़ा अवसर
सेंदाई स्थित कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रॉन मियागी लिमिटेड (TEL Miyagi) ने पीएम मोदी को अपनी ग्लोबल सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भूमिका और भारत के साथ चल रहे सहयोग की जानकारी दी। कंपनी भारत में निर्माण और परीक्षण के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर काम कर रही है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस दौरे से दोनों देशों को आपसी सहयोग की व्यावहारिक समझ मिली है।
तकनीकी और आर्थिक साझेदारी पर फोकस
मोदी और इशिबा ने शुक्रवार को व्यापक चर्चा की। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सैमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्युटिकल, टेलीकॉम और क्रिटिकल मिनरल जैसे क्षेत्रों में सप्लाई चेन को मज़बूत करना आवश्यक है। भारत और जापान ने इस दिशा में मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।
जापान का बड़ा निवेश वादा
जापान ने घोषणा की कि वह अगले 10 सालों में भारत में करीब 10 ट्रिलियन येन (लगभग 60,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगा। यह निवेश आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के लिए ढांचा तैयार करने और आर्थिक सुरक्षा को लेकर 10 वर्षीय रोडमैप पर भी सहमति जताई।
वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत-जापान की साझेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि जब अमेरिका की व्यापार और टैरिफ नीतियों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चित दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में भारत और जापान की यह साझेदारी रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है। दोनों देशों ने स्पष्ट कर दिया कि वे तकनीकी क्रांति और आपसी सहयोग के जरिए वैश्विक चुनौतियों का सामना करेंगे।
भविष्य की दिशा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जापान के साथ मिलकर भारत न केवल सेमीकंडक्टर उद्योग में आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करेगा। वहीं जापान ने भरोसा जताया कि भारत एशिया में उसका सबसे बड़ा साझेदार बनेगा।
