नेपाल में सोमवार से सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। राजधानी समेत कई हिस्सों में जेन-ज़ी युवा वर्ग सड़कों पर उतर आया है और हिंसक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। इसी बीच नेपाल की सियासत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने सबका ध्यान खींच लिया है।
सुशीला कार्की का नाम खारिज
जानकारी के मुताबिक, जेन-ज़ी के नेताओं ने प्रशासन के साथ हुई बैठक के बाद पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए खारिज कर दिया है। शुरुआत में उन्हें अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन संगठन के भीतर ही उनके नाम पर सहमति नहीं बन सकी।
नई सिफारिश: इंजीनियर कुलमन घिसिंग
सुशीला कार्की का नाम वापस लिए जाने के बाद जेन-ज़ी नेताओं ने इंजीनियर कुलमन घिसिंग को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया है। घिसिंग नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के पूर्व कार्यकारी निदेशक रह चुके हैं और देश को लंबे समय से जारी लोड शेडिंग संकट से बाहर निकालने के लिए लोकप्रिय माने जाते हैं। अब उनका नाम अंतरिम सरकार की अगुवाई करने की दौड़ में शामिल हो गया है।
संवैधानिक आपत्तियों का हवाला
जेन-ज़ी समूह की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि संविधान के मुताबिक पूर्व मुख्य न्यायाधीश और जज प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इसके अलावा, सुशीला कार्की की उम्र 70 साल से अधिक होने के कारण भी उन्हें इस भूमिका के लिए अयोग्य बताया गया है। यही वजह है कि उनका नाम आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया गया।
अन्य संभावनाओं पर भी चर्चा
बयान में आगे कहा गया है कि बालेन्द्र शाह ने सरकार की बागडोर संभालने में कोई रुचि नहीं दिखाई, वहीं हरक संपांग के प्रधानमंत्री बनने की संभावना बेहद कम है। इस स्थिति में सुशीला कार्की का विकल्प भी टिकाऊ नहीं रहा। ऐसे में जेन-ज़ी नेताओं ने सर्वसम्मति से कुलमन घिसिंग का नाम आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
घिसिंग पर जताया भरोसा
जेन-ज़ी समूह ने अपने बयान में कुलमन घिसिंग को देशभक्त और जनता का पसंदीदा चेहरा बताया। उनका कहना है कि घिसिंग के नेतृत्व में ही नेपाल ने बिजली संकट से निजात पाई थी और उन्होंने अपनी कार्यकुशलता से जनता का विश्वास जीता है। यही कारण है कि उन्हें अंतरिम सरकार की कमान सौंपना देशहित में उचित कदम माना जा रहा है।
आगे की राह चुनौतीपूर्ण
नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता और सोशल मीडिया बैन से पैदा हुआ असंतोष सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जेन-ज़ी नेताओं के बीच कुलमन घिसिंग के नाम पर कितनी सहमति बन पाती है और क्या वे वास्तव में नेपाल के अगले अंतरिम प्रधानमंत्री बन पाते हैं।
