14 जनवरी, मकर संक्रांति के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित हो रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ दफ्तर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने और औपनिवेशिक विरासत से आगे बढ़ने के विजन का अहम हिस्सा है। आज़ादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) साउथ ब्लॉक से बाहर शिफ्ट हो रहा है।
सेंट्रल विस्टा परियोजना का अहम पड़ाव
‘सेवा तीर्थ’ परिसर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बनाया गया है। लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परिसर 2,26,203 वर्ग फुट में फैला हुआ है। इसका निर्माण देश की जानी-मानी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने किया है। इस परियोजना का उद्देश्य सरकार के कामकाज को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और प्रभावी बनाना है।
तीन इमारतों का संगम: सेवा तीर्थ
‘सेवा तीर्थ’ कुल तीन प्रमुख इमारतों से मिलकर बना है।
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सेवा तीर्थ-1: यहां प्रधानमंत्री कार्यालय होगा। इसमें आधुनिक वर्कस्पेस, बैठक कक्ष और औपचारिक कार्यक्रमों के लिए भव्य हॉल बनाए गए हैं।
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सेवा तीर्थ-2: यह इमारत पहले ही सितंबर 2025 में कैबिनेट सचिवालय को सौंप दी गई थी।
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सेवा तीर्थ-3: इस भवन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) का कार्यालय होगा।
इन तीनों महत्वपूर्ण संस्थानों को एक ही परिसर में लाने से प्रशासनिक तालमेल और सुरक्षा व्यवस्था दोनों मजबूत होंगी।
साउथ और नॉर्थ ब्लॉक बनेंगे म्यूजियम
पीएमओ के शिफ्ट होते ही ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को खाली किया जाएगा। इन्हें अब ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यह म्यूजियम आम जनता के लिए खोला जाएगा, जहां भारत की सभ्यता, संस्कृति और विकास यात्रा को दर्शाया जाएगा।
इसके तकनीकी और डिजाइन विकास के लिए 19 दिसंबर 2024 को फ्रांस की म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ समझौता भी किया जा चुका है।
औपनिवेशिक सोच से आगे बढ़ने की पहल
प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से औपनिवेशिक प्रतीकों से मुक्ति की बात करते रहे हैं। राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ करना इसी सोच का हिस्सा था। ‘सेवा तीर्थ’ और इसके आसपास बन रहा नया प्रधानमंत्री आवास ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव पार्ट-2’ भी इसी विजन को आगे बढ़ाता है। यह बदलाव भारत की अपनी पहचान और आधुनिक सोच को दर्शाता है।
आधुनिकता और कार्यकुशलता पर फोकस
‘सेवा तीर्थ’ और नया केंद्रीय सचिवालय सरकार के कामकाज को तेज और प्रभावी बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर फैले मंत्रालयों को एक जगह लाने के लिए कॉमन सेंट्रल सचिवालय (CCS) बनाया जा रहा है। इसी के तहत ‘कर्तव्य भवन’ जैसे आधुनिक कार्यालय पहले ही शुरू हो चुके हैं।
