पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत जलने से घायल मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 265 बर्न ट्रीटमेंट पर करीब 1.39 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस सुविधा का मकसद यह है कि आग से झुलसे मरीजों और उनके परिवारों को महंगे इलाज के लिए पैसों की चिंता न करनी पड़े।
बठिंडा में सबसे ज्यादा मरीजों को लाभ
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बठिंडा जिले में सबसे ज्यादा लाभार्थी सामने आए। यहां 57 मरीजों को उपचार मिले और इन पर करीब 33.51 लाख रुपये खर्च हुए। इसके बाद फरीदकोट और पटियाला में भी बड़ी संख्या में मरीजों को योजना का लाभ मिला।
बच्चों और युवाओं में भी सामने आए मामले
बर्न ट्रीटमेंट का लाभ अलग-अलग उम्र के मरीजों को मिला है। आंकड़ों में 18 साल तक के बच्चों के साथ-साथ युवाओं और कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या भी उल्लेखनीय रही। 31 से 45 साल की उम्र के पुरुषों में 61 उपचार दर्ज किए गए, जिन पर करीब 31.82 लाख रुपये खर्च हुए।
जलने के बाद लंबे इलाज की जरूरत
आग से झुलसने के बाद मरीज का इलाज केवल शुरुआती उपचार तक सीमित नहीं रहता। कई मामलों में बार-बार ड्रेसिंग, सर्जरी, त्वचा से जुड़े उपचार और लंबे समय तक रिहैबिलिटेशन की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से कैशलेस इलाज परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक राहत बन सकता है।
75 मरीजों को पोस्ट-बर्न इलाज भी मिला
योजना के तहत पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर के 75 उपचार भी किए गए, जिन पर करीब 38.90 लाख रुपये खर्च हुए। जलने के बाद बनने वाले सिकुड़े हुए निशान कई बार शरीर की सामान्य गतिविधियों और हाथ-पैरों की आवाजाही को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में आगे का उपचार जरूरी होता है।
हादसे के बाद इलाज की चिंता कम करने पर जोर
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, जलने की चोट का असर आग बुझने के बाद भी लंबे समय तक रह सकता है। ऐसे मरीजों को इलाज, रिकवरी और सामान्य जीवन में लौटने पर ध्यान देने का मौका मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री सेहत योजना के जरिए सरकार का फोकस आर्थिक परेशानी को इलाज के रास्ते में बाधा बनने से रोकने पर है।
