पंजाब के स्कूल शिक्षा विभाग ने उन निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो पिछले चार महीनों से बार-बार किए गए अनुरोधों के बावजूद निजी प्रकाशकों की किताबों की सूची विभाग को नहीं भेज रहे हैं। इस लापरवाही के कारण, विभाग ने पंजाब मानवाधिकार आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की, जो कि एक गंभीर मसला बन चुका है।
शिक्षा विभाग की ओर से सख्त कदम
पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और अब इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना लिया है। विभाग के उच्च अधिकारियों ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि निजी स्कूलों द्वारा किताबों की सूची विभाग को भेजी जाए। यदि इसके बाद भी कोई स्कूल लापरवाही करता है, तो मानवाधिकार आयोग की टीम उन स्कूलों का दौरा करेगी, किताबों की सूची का पता लगाएगी और स्कूल के प्रिंसिपल से जवाब मांगेगी।
समस्या का विवरण
अप्रैल 2025 में विभाग ने सभी निजी स्कूलों को एक पत्र भेजा था, जिसमें उनसे यह अनुरोध किया गया था कि वे अपने स्कूलों में पढ़ाई जा रही निजी प्रकाशकों की किताबों की सूची विभाग को भेजें। विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा था कि यह सूचना मानवाधिकार आयोग के पास भेजी जानी थी, लेकिन अब तक कई जिलों से कोई जवाब नहीं मिला है। अमृतसर, फतेहगढ़ साहिब, जालंधर और मानसा जिलों को छोड़कर अन्य जिलों के स्कूलों ने यह जानकारी भेजी नहीं है। इस स्थिति को गंभीर लापरवाही मानते हुए विभाग अब इस मुद्दे पर कठोर कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।
मानवीय अधिकार आयोग का हस्तक्षेप
इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, अब यह मामला मानवाधिकार आयोग में विचाराधीन है। पंजाब मानवाधिकार आयोग ने पहले ही विभाग से जवाब मांगा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शिक्षा विभाग ने अपनी चिट्ठी में साफ तौर पर कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की देरी नहीं की जाएगी और मानवाधिकार आयोग के आदेशों के अनुरूप शीघ्र कदम उठाए जाएंगे।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि यह मामला बहुत संवेदनशील है और इसमें कोई लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि निजी स्कूलों ने अपनी जिम्मेदारी का पालन नहीं किया, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि निजी स्कूलों में बच्चों को मानक और प्रमाणित किताबें ही पढ़ाई जाएं और छात्रों के शैक्षिक अधिकारों का उल्लंघन न हो।
