बरसात के असर से निपटने के बाद अब लोगों को ठंड की मार झेलने के लिए भी तैयार रहना होगा। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस बार सर्दी दीवाली से पहले अक्टूबर में ही दस्तक दे सकती है। इस समय ला नीना (La Niña) के सक्रिय होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
ला नीना क्या है?
ला नीना तब होता है जब भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से कम हो जाता है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर मौसम में बड़े पैमाने पर बदलाव आते हैं। ला नीना का असर न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पर दिखाई देता है।
इससे क्या-क्या प्रभाव पड़ सकते हैं?
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भारत में औसत से अधिक ठंड पड़ सकती है।
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लंबी अवधि तक पाला और कोहरा देखने को मिल सकता है।
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हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी होने की संभावना है।
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खेतीबाड़ी, पानी की सप्लाई, बिजली की मांग और स्थानीय इकोसिस्टम पर भी असर पड़ेगा।
अमेरिकी एजेंसियों और IMD का अलर्ट
अमेरिकी Climate Prediction Center (CPC) ने 11 सितंबर 2025 को ला नीना वॉर्निंग जारी की। एजेंसी के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर 2025 में ला नीना विकसित होने की 71% संभावना है। वहीं दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 में यह संभावना घटकर 54% तक रह सकती है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी अपने नए ENSO बुलेटिन में पुष्टि की है कि इस बार ला नीना होने की संभावना 50% से अधिक है।
ठंड की तीव्रता बढ़ सकती है
IMD के अधिकारी बताते हैं कि ला नीना वाले सालों में सामान्य से ज्यादा ठंड पड़ती है। हालांकि, वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही गर्मी का असर ठंड की तीव्रता को कुछ हद तक कम कर सकता है। फिर भी इस साल की संभावनाएँ साफ बताती हैं कि सर्दियां लंबी और कठोर हो सकती हैं।
बरसात के बाद अब लोग ठंड के लिए तैयार रहें। ला नीना के सक्रिय होने के कारण आने वाले महीनों में पाला, बर्फबारी और ठंड के थपेड़े सामान्य से ज्यादा होने की संभावना है। नागरिकों और किसानों को मौसम के मुताबिक सुरक्षा और तैयारी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि ठंड के असर से बचाव हो सके।
