पंजाब में आई भयावह बाढ़ को लेकर राजनीति तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने विधानसभा के विशेष सत्र में बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह प्राकृतिक आपदा पूरी तरह से दशकों की राजनीतिक लापरवाही और भ्रष्ट फैसलों का नतीजा है। अरोड़ा ने कांग्रेस, अकाली-भाजपा सरकारों और केंद्र में बैठी भाजपा सरकार को सीधा जिम्मेदार ठहराया।
रामसर साइट पर विवाद
अमन अरोड़ा ने कांग्रेस सरकार द्वारा साल 2017 में लिए गए एक फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। उस समय ब्यास नदी के 260 किलोमीटर लंबे हिस्से को “रामसर साइट” घोषित कर दिया गया था। अरोड़ा के मुताबिक, यह फैसला बिना वैज्ञानिक सोच और गहराई से विचार किए सिर्फ राजनीति के लिए लिया गया था। इस कारण नदी की सफाई और रखरखाव कानूनी रूप से मुश्किल हो गया और कई जिलों में बाढ़ का असर सीधा देखने को मिला।
डैम और झीलों की उपेक्षा
अरोड़ा ने भाखड़ा डैम को “टाइम बम” बताते हुए कहा कि उसमें लगातार गाद भरने से उसकी क्षमता करीब 25% तक घट चुकी है। इसके लिए उन्होंने पिछली सरकारों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
इसी तरह, हरिके झील की क्षमता 56% तक कम होने की रिपोर्ट भी उन्होंने पेश की। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने कई बार राजस्थान को पत्र लिखकर डी-सिल्टिंग में सहयोग मांगा, लेकिन वहां से कोई मदद नहीं मिली। नतीजा यह हुआ कि झील का प्रबंधन बिगड़ता चला गया।
पानी प्रबंधन पर केंद्र को घेरा
अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार पर भी बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि डैमों का नियंत्रण केंद्र के हाथ में है और रिपेरियन सिद्धांत को नजरअंदाज करते हुए पंजाब जैसे राज्यों को पड़ोसी गैर-रिपेरियन राज्यों को पानी छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। इससे बाढ़ की मार सीधे पंजाब को झेलनी पड़ती है। उन्होंने इसे “सबसे अन्यायपूर्ण कानून” बताया।
नदियों पर कब्जा और सरकारों की चूक
उन्होंने बताया कि नॉर्दर्न कैनाल एंड ड्रेनेज एक्ट, 1878 के तहत सरकार को नदियों और नालों को नोटिफाई करने का अधिकार है, ताकि गैर-कानूनी कब्जों को रोका जा सके। लेकिन कांग्रेस और अकाली-भाजपा शासन के दौरान एक भी नदी को नोटिफाई नहीं किया गया। इसके कारण नदियों के किनारे कब्जे होते गए और बाढ़ का असर कई गुना बढ़ गया।
इसके विपरीत, उन्होंने मौजूदा मान सरकार के कदम की सराहना की, जिसने 850 से ज्यादा जल स्रोतों को नोटिफाई किया है।
राहत फंड का हिसाब
अरोड़ा ने सदन में स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड (SDRF) का ब्योरा भी पेश किया। उन्होंने बताया कि 25 साल में केंद्र ने पंजाब को 6190 करोड़ रुपये दिए, जिसमें से ज्यादातर पिछली सरकारों के दौरान आए। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में 1582 करोड़ रुपये मिले हैं। पंजाब सरकार ने खुद भी 2042 करोड़ रुपये का योगदान किया और कुल 4305 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
उन्होंने कांग्रेस सरकार के समय की वित्तीय स्थिति को भी याद दिलाया, जब 2017 में कैग रिपोर्ट के अनुसार खाते में पैसा होने के बावजूद आरबीआई ने पंजाब सरकार को ओवरड्राफ्ट के कारण दिवालिया घोषित कर दिया था।
विपक्ष पर हमला और भावुक अपील
अमन अरोड़ा ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि जब लोग बाढ़ की मार झेल रहे थे, तब विपक्ष केवल राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप में उलझा रहा। उन्होंने कहा कि असली लड़ाई केंद्र से बड़े राहत पैकेज की मांग को लेकर है।
हरिके पत्तन के पास तबाह हुए गांवों का जिक्र करते हुए अरोड़ा भावुक हो गए। उन्होंने सभी 117 विधायकों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेद भूलकर एकजुट होकर केंद्र से राहत पैकेज की मांग करें, ताकि लोगों के नुकसान की भरपाई हो सके।
अमन अरोड़ा का बयान पंजाब की बाढ़ पर एक बड़ा राजनीतिक वार साबित हुआ। उन्होंने साफ कर दिया कि मौजूदा संकट केवल प्राकृतिक नहीं बल्कि दशकों से चली आ रही लापरवाही और गलत नीतियों का नतीजा है। अब देखना यह होगा कि केंद्र और राज्य मिलकर पंजाब के लिए राहत और पुनर्वास की दिशा में क्या ठोस कदम उठाते हैं।
