गाजा पट्टी में पिछले एक साल से जारी संघर्ष अब खत्म होने की उम्मीद दिखाई देने लगी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (29 सितंबर) को खुलासा किया कि उन्होंने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच युद्ध को रोकने के लिए मध्यस्थता की है और अब समझौता लगभग अंतिम चरण में है।
ट्रंप ने कहा कि वे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ लगातार संपर्क में हैं और जल्द ही शांति समझौते को अमलीजामा पहनाया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता न केवल इजरायल और फिलिस्तीन के लिए, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व और दुनिया के लिए ऐतिहासिक साबित होगा।
अरब और मुस्लिम देशों का समर्थन
ट्रंप ने अपने बयान में बताया कि इस शांति योजना को कई अरब और मुस्लिम देशों का समर्थन मिल चुका है। उन्होंने कहा,
“मैं सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, तुर्किए और इंडोनेशिया के नेताओं का धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने इस प्रस्ताव का स्वागत किया। यूरोप के कई देश भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।”
इस बयान से साफ है कि अमेरिका ने केवल इजरायल और फिलिस्तीन को ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के देशों को इस योजना से जोड़ने की कोशिश की है।
पाकिस्तान की अहम भूमिका
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रंप ने पाकिस्तान की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने शुरुआत से ही इस शांति पहल का समर्थन किया है।
ट्रंप ने कहा,
“पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल मुनीर हमारे साथ खड़े रहे। उन्होंने हाल ही में एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि वे इस समझौते में पूरी तरह विश्वास करते हैं और इसका सौ प्रतिशत समर्थन करते हैं।”
यह पहली बार है जब गाजा मुद्दे पर पाकिस्तान और अमेरिका की राय इतनी नजदीक दिखाई दी है।
कब शुरू हुआ संघर्ष?
गाजा युद्ध की शुरुआत अक्टूबर 2023 में हुई थी। फिलिस्तीनी संगठन हमास ने गाजा पट्टी से इजरायल पर हमला किया था। इस हमले में कई निर्दोष इजरायली नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में इजरायल ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया।
तब से अब तक हजारों लोग इस संघर्ष में मारे जा चुके हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं। गाजा की स्थिति बेहद खराब है – बिजली, पानी और दवाइयों की भारी कमी है। संयुक्त राष्ट्र भी लगातार युद्धविराम की अपील करता रहा है।
शांति की किरण
अब जबकि ट्रंप ने दावा किया है कि समझौता लगभग तैयार है और नेतन्याहू भी इसके लिए राजी हो गए हैं, तो उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में युद्ध पूरी तरह थम सकता है।
अगर यह समझौता सफल होता है, तो गाजा में लंबे समय से चल रही हिंसा रुक जाएगी और वहां शांति स्थापित हो सकेगी। यह केवल गाजा और इजरायल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में स्थिरता के लिए बेहद अहम कदम होगा।
गाजा संघर्ष ने पूरे विश्व का ध्यान खींचा है। अब अमेरिका की मध्यस्थता और ट्रंप की पहल से शांति समझौते का रास्ता साफ होता दिख रहा है। अरब देशों का समर्थन और पाकिस्तान की भागीदारी इसे और मजबूत बना रही है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो जल्द ही गाजा की जनता को युद्ध की तबाही से राहत मिल सकती है।
