अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगाने के फैसले ने भारतीय निर्यातकों के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी है। उद्योग विशेषज्ञों और संगठनों का कहना है कि इस निर्णय से विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे उत्पादन इकाइयों में बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका जताई जा रही है।
टैरिफ लागू होने की समयसीमा और प्रभावित क्षेत्र
व्हाइट हाउस के कार्यकारी आदेश के अनुसार, यह नया टैरिफ 7 अगस्त से प्रभावी होगा। हालांकि, जो भारतीय सामान 7 अगस्त से पहले अमेरिका रवाना होकर 5 अक्टूबर तक पहुंच जाएगा, उस पर केवल 10% का ही बेसिक टैक्स लगेगा। ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमीनियम जैसे क्षेत्रों पर पहले से ही क्षेत्रीय टैक्स लागू रहेगा। फार्मा, सेमीकंडक्टर, कच्चा तेल और ऊर्जा उत्पादों को हालांकि कुछ राहत दी गई है।
निर्यात में संभावित गिरावट का अनुमान
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का वस्तु निर्यात 2025 के 86.5 अरब डॉलर से गिरकर 2026 में 60.6 अरब डॉलर तक आ सकता है। अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप न दिए जाने के कारण भारत को अन्य देशों की तुलना में अधिक टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।
टैरिफ के पीछे BRICS सदस्यता और रूस संबंध को ठहराया जिम्मेदार
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने इस टैरिफ की जिम्मेदारी भारत की BRICS सदस्यता और रूस से संबंधों को बताया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि रूस के साथ भारत के संबंध अमेरिका-भारत द्विपक्षीय संबंधों में तनाव का कारण बन रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर संतुलित प्रतिक्रिया दी है, जिसमें कहा गया कि दोनों देशों की साझेदारी में विविधताएं हैं, लेकिन संबंध मजबूत बने रहेंगे।
कपड़ा उद्योग की मांग: सरकार करे हस्तक्षेप
भारतीय कपड़ा निर्यातकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल जल्द ही निर्यातकों से मुंबई में मुलाकात कर सकते हैं।
बैंकों ने बदली रणनीति, MSME सेक्टर को लेकर बढ़ी सतर्कता
टैरिफ के कारण संभावित जोखिमों को देखते हुए बैंकों ने MSME सेक्टर को लेकर सतर्क रुख अपनाना शुरू कर दिया है। बैंक अब नए कर्ज देने में सावधानी बरत सकते हैं, साथ ही अधिक गारंटी की मांग या उच्च ब्याज दर पर ऋण देने की रणनीति भी अपना सकते हैं।
MSME सेक्टर के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ीं
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, टैरिफ के कारण MSME इकाइयों को मार्जिन में कमी, ऑर्डर रद्द होने, इनवेंटरी में वृद्धि और नकदी संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अभी तक इस क्षेत्र में संपत्ति की गुणवत्ता स्थिर रही है, लेकिन नए हालात में तनाव बढ़ सकता है।
द्विपक्षीय व्यापार संबंधों पर गहराता संकट
डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति भारत-अमेरिका के आर्थिक रिश्तों को एक नई चुनौती में डाल सकती है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर केवल निर्यात पर ही नहीं, बल्कि भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों की स्थिरता पर भी पड़ेगा। सरकार और उद्योग दोनों को मिलकर एक संतुलित रणनीति बनानी होगी ताकि संभावित आर्थिक संकट को टाला जा सके।
