संजीव अरोड़ा ने निजी कंपनियों से दिया इस्तीफा, अब निभाएंगे कैबिनेट मंत्री का दायित्व
पंजाब के नव-निर्वाचित विधायक और हाल ही में कैबिनेट मंत्री नियुक्त हुए संजीव अरोड़ा ने एक बड़ा फैसला लेते हुए हैम्पटन स्काई रियलिटी लिमिटेड और उससे जुड़ी आठ अन्य कंपनियों में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 3 अगस्त 2025 से प्रभावी अपना इस्तीफा कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को लिखित रूप में सौंप दिया।
जनसेवा को दी प्राथमिकता, इस्तीफे में जताई प्रतिबद्धता
अपने इस्तीफा पत्र में अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि पंजाब विधानसभा में 23 जून 2025 को हुए चुनावों में जीत हासिल करने के बाद उन्हें राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री पद की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। राज्यपाल ने 3 जुलाई 2025 से उन्हें औपचारिक रूप से मंत्री पद पर नियुक्त किया। ऐसे में उन्हें अब पूर्ण रूप से जनसेवा और संवैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन पर ध्यान केंद्रित करना है।
कहा- निजी पद पर बने रहना जनहित के विरुद्ध
संजीव अरोड़ा ने इस्तीफा देते हुए कहा कि मंत्री पद की संवैधानिक और नैतिक ज़िम्मेदारियों को देखते हुए किसी भी निजी कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर कार्य करना अब उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने इसे न केवल अनुचित बल्कि जनहित के प्रतिकूल भी बताया। उनके अनुसार, एक जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी पहली प्रतिबद्धता राज्य और उसके नागरिकों के प्रति है।
कंपनी के प्रति जताया आभार, भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं
अरोड़ा ने हैम्पटन स्काई रियलिटी लिमिटेड और अन्य संबंधित कंपनियों के बोर्ड, वरिष्ठ प्रबंधन और समस्त शेयरधारकों को उनके निरंतर समर्थन और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सदैव निष्ठा और ईमानदारी से कार्य किया, और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि कंपनी आगे भी जिम्मेदार नेतृत्व में आगे बढ़ती रहेगी।
राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध: अरोड़ा
इस्तीफा देते हुए अरोड़ा ने दोहराया कि वह अब पूरी तरह से राज्य के विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण के लिए कार्यरत रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह प्रगतिशील नीतियों के निर्माण और पंजाब के नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर काम करते रहेंगे।संजीव अरोड़ा का यह कदम दिखाता है कि वह अपने सार्वजनिक जीवन को पूरी तरह से पारदर्शिता और समर्पण के साथ निभाना चाहते हैं। मंत्री पद संभालने के बाद उनके द्वारा निजी पदों से इस्तीफा देना एक मजबूत नैतिक संदेश भी देता है।
