कर्नाटक कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने आज बेंगलुरु में ‘कावेरी रेजिडेंस’ स्थित सीएम आवास पर नाश्ते पर मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व बदलाव को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है।
हाइकमांड के निर्देश के बाद बैठक
सूत्रों का कहना है कि यह मुलाकात पार्टी हाईकमान के निर्देश पर आयोजित की गई। शिवकुमार सुबह करीब 10 बजे मुख्यमंत्री के घर पहुंचे और यह बैठक लगभग एक घंटे तक चली। इस दौरान मुख्यमंत्री के कानूनी सलाहकार ए.एस. पोनन्ना भी मौजूद रहे। बैठक की गोपनीयता बनाए रखने के लिए CM ने अपने स्टाफ को निर्देश दिया था कि चर्चा के दौरान किसी भी अन्य व्यक्ति को अंदर न आने दिया जाए।
कोई मतभेद नहीं, सिर्फ भ्रम दूर किया—सिद्धरमैया
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सिद्धरमैया ने स्पष्ट किया कि उनके और शिवकुमार के बीच किसी भी तरह का मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारे बीच बात बहुत अच्छी हुई। भविष्य में भी कोई विवाद नहीं होगा। हम मिले थे ताकि फैल रहे भ्रम को दूर किया जा सके।”
सीएम ने बताया कि बैठक में विपक्ष से मुकाबला करने की रणनीति पर चर्चा हुई और 2028 के विधानसभा चुनावों का भी जिक्र आया।
कैबिनेट विस्तार पर भी हुई बात
सिद्धरमैया ने यह भी बताया कि बैठक में कैबिनेट reshuffle के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जो भी फैसला होगा, वह पार्टी हाईकमान ही करेगा और दोनों नेता उसी का पालन करेंगे। बैठक में तय हुआ कि शिवकुमार दिल्ली जाएंगे और वहां हाइकमांड से मुलाकात करेंगे।
शिवकुमार बोले—मीटिंग रही बेहद उत्पादक
उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर फोटो साझा करते हुए लिखा कि सुबह की ये मुलाकात “कर्नाटक की प्राथमिकताओं और आगे की रणनीति पर एक उत्पादक चर्चा” थी।
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि शिवकुमार का गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर हाइकमांड पर दबाव बनाए हुए है। माना जाता है कि उन्होंने सिद्धरमैया को 2023 में सरकार गठन के समय हुए ‘2.5 साल के पावर-शेयरिंग’ फॉर्मूले की याद भी दिलाई होगी।
दिल्ली रवाना होंगे शिवकुमार
सूत्रों के मुताबिक, डी.के. शिवकुमार आज दोपहर दिल्ली रवाना हो सकते हैं। वह पहले ही दिल्ली जाने वाले थे लेकिन इस नाश्ते की बैठक के कारण उनकी यात्रा एक दिन के लिए टल गई। उनके छोटे भाई डी.के. सुरेश पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं।
कर्नाटक की राजनीति में यह मुलाकात कई सवाल खड़े करती है और आने वाले दिनों में कांग्रेस सरकार की दिशा काफी हद तक इसी चर्चा पर निर्भर हो सकती है।
