पंजाब सरकार ने अमृतसर शहर की लंबे समय से चली आ रही सीवरेज समस्या को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में अमृत 2.0 योजना के तहत 60 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और उससे जुड़े पंपिंग स्टेशन को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि इस परियोजना से शहर की सीवरेज व्यवस्था पहले से अधिक प्रभावी और आधुनिक बनेगी।
अगस्त में टेंडर बंद, जल्द शुरू होगा निर्माण
इस परियोजना के लिए टेंडर पहले ही जारी किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, अगस्त 2026 में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि परियोजना को तय समय के भीतर पूरा कर शहरवासियों को बेहतर सीवरेज सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
बढ़ेगी ट्रीटमेंट क्षमता, घटेगा प्रदूषण
नया प्लांट शुरू होने के बाद अमृतसर की सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इससे मौजूदा सीवरेज सिस्टम पर पड़ रहा अतिरिक्त दबाव कम होगा और बिना उपचार के गंदे पानी के नालों और जल स्रोतों में जाने की समस्या भी घटेगी। इससे शहर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कचरे से बनेगी बायो-सीएनजी
इस परियोजना की एक खास बात यह भी है कि सीवरेज से निकलने वाले वेस्ट का उपयोग बायो-सीएनजी बनाने में किया जाएगा। इससे गंदगी के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ स्वच्छ और हरित ऊर्जा का उत्पादन भी होगा। सरकार का मानना है कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
अमृत 2.0 के तहत तेजी से चल रहे विकास कार्य
यह परियोजना पंजाब सरकार के अमृत 2.0 अभियान का हिस्सा है, जिसके माध्यम से राज्य के विभिन्न शहरों में शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 64 से अधिक परियोजनाएं राज्य को समर्पित की जा चुकी हैं, जबकि लगभग 50 से 60 अन्य परियोजनाओं को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने क्या कहा
स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि अमृतसर एक पवित्र और ऐतिहासिक शहर है, इसलिए यहां की सीवरेज, कूड़ा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में ऐसा मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों तक शहर की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सके।
