अयोध्या राम मंदिर के दान घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों ने आरोपियों के मोबाइल फोन से डिलीट किया गया डेटा रिकवर किया है, जिससे कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल में मौजूद चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड ने जांच को नई दिशा दी है। इसी डिजिटल साक्ष्य के आधार पर दान की रकम में कथित गड़बड़ी के कई पहलुओं की पुष्टि करने का प्रयास किया जा रहा है।
दो करोड़ रुपये से अधिक की कथित हेराफेरी की आशंका
जांच में अब तक सामने आए तथ्यों के अनुसार, दान पेटियों से प्राप्त रकम में लगभग दो करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी होने की आशंका जताई जा रही है। जांच टीम का मानना है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और इसमें कई लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। आरोप है कि दान की गिनती और जमा करने की प्रक्रिया के दौरान व्यवस्थित तरीके से रकम गायब की जाती रही।
डिजिटल साक्ष्यों से मजबूत हुई जांच
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मोबाइल डेटा के अलावा बैंक खातों, लेनदेन के रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, रिकवर किए गए डिजिटल रिकॉर्ड से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धन का प्रवाह किस तरह हुआ और किन-किन लोगों के बीच संपर्क बना रहा। जांच एजेंसियां अब इन जानकारियों का मिलान अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों से भी कर रही हैं।
सोना-चांदी के दान की भी जांच
जांच केवल नकद दान तक सीमित नहीं है। अधिकारियों को संदेह है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने और चांदी के आभूषणों के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी हो सकती है। इसी वजह से बहुमूल्य धातुओं की एंट्री, वजन और भंडारण से जुड़े दस्तावेजों की भी विस्तार से जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं दान में मिले कीमती आभूषणों के साथ भी अनियमितता तो नहीं हुई।
कई लोगों से पूछताछ, आगे और खुलासे की संभावना
मामले में गिरफ्तार और संदिग्ध लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि कथित हेराफेरी कितने समय से चल रही थी और इसमें किस स्तर तक लोगों की संलिप्तता रही। सूत्रों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर आगे भी नए खुलासे हो सकते हैं। इसी बीच, मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट की बैठक में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।
