अमरनाथ यात्रा 2026 के दौरान बाबा बर्फानी के प्राकृतिक हिम शिवलिंग के तेजी से पिघलने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि यात्रा शुरू होने के कुछ ही दिनों के भीतर हिम शिवलिंग का आकार काफी छोटा हो गया और इसके अधिकांश हिस्से के पिघल जाने की बात कही जा रही है। इस बार यात्रा 57 दिनों की है, लेकिन शुरुआती सप्ताह में ही शिवलिंग के तेजी से पिघलने ने श्रद्धालुओं और विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
क्यों जल्दी पिघल रहा है हिम शिवलिंग?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया से तैयार होता है। गुफा की छत से टपकने वाला पानी शून्य से नीचे तापमान में जमकर धीरे-धीरे शिवलिंग का आकार लेता है। इस बार तापमान में बढ़ोतरी, कम बर्फबारी, मौसम में बदलाव और गुफा के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियों को इसके जल्दी पिघलने के संभावित कारणों में माना जा रहा है। हालांकि किसी एक कारण की आधिकारिक वैज्ञानिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
पिछले कुछ वर्षों में भी दिखा ऐसा रुझान
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भी बाबा बर्फानी का हिम शिवलिंग यात्रा पूरी होने से पहले पिघलता रहा है। वर्ष 2018 में यह लगभग 29 दिनों में, 2020 में 38 दिनों में, 2022 में 28 दिनों में और 2024 में करीब एक सप्ताह के भीतर काफी हद तक पिघल गया था। इस बार भी यात्रा के शुरुआती दिनों में ही शिवलिंग के तेजी से छोटे होने की खबर सामने आई है।
बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या पर भी उठे सवाल
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों और नेताओं का कहना है कि बढ़ती भीड़, गुफा के आसपास विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा और लगातार बढ़ रही मानवीय गतिविधियां भी स्थानीय वातावरण को प्रभावित कर सकती हैं। इसी कारण कई लोगों ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराने की मांग उठाई है, ताकि हिम शिवलिंग के जल्दी पिघलने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
आस्था बनी हुई है अटूट
हिम शिवलिंग के पिघलने की खबर के बावजूद अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की आस्था पहले की तरह कायम है। देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए लगातार पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि हिम शिवलिंग का आकार चाहे छोटा हो जाए, लेकिन उनकी श्रद्धा और विश्वास में कोई कमी नहीं आई है।
