मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजार लगातार दबाव में रहा। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,054.94 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 भी 159 अंकों की कमजोरी के साथ 24,052.05 पर बंद हुआ। लगातार तीन कारोबारी सत्र की तेजी के बाद बाजार में यह बड़ी गिरावट देखने को मिली।
वैश्विक तनाव का बाजार पर असर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे कच्चे तेल से महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका भी बाजार पर दबाव का कारण बनी।
कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली
मंगलवार के कारोबार में बैंकिंग, ऑटो और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली की। हालांकि फार्मा सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली। बाजार में व्यापक बिकवाली के कारण अधिकांश सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।
कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों की नजर कंपनियों के पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों पर भी बनी हुई है। कई बड़ी कंपनियां अपने परिणाम जारी कर रही हैं, जिससे चुनिंदा शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम भी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आगे भी रह सकती है अस्थिरता
बाजार जानकारों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और वैश्विक घटनाक्रम के साथ कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। बाजार में फिलहाल निवेशकों का रुख सावधानी भरा बना हुआ है और हर नई अंतरराष्ट्रीय घटना का सीधा असर घरेलू शेयर बाजार पर दिखाई दे रहा है।
