पंजाब के उच्च शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने पंजाब विधानसभा में एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीमावर्ती और पिछड़े इलाकों में नए सरकारी कॉलेज खोलने जा रही है। इसका मकसद इन क्षेत्रों में रह रहे विद्यार्थियों को भी अच्छी और सस्ती शिक्षा मुहैया कराना है।
श्री बैंस ने विधानसभा में रियात बाहरा प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, होशियारपुर विधेयक 2025 और सी.जी.सी. यूनिवर्सिटी, मोहाली विधेयक 2025 पेश करते हुए कहा कि पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से तरक्की कर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के सरकारी कॉलेजों में पिछले कुछ समय में 85% तक दाखिलों में वृद्धि हुई है।
शिक्षा के आंकड़े जो उम्मीद जगाते हैं
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी, प्राइवेट और अनुदान प्राप्त कॉलेजों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022 में जहां लगभग 7 लाख विद्यार्थी कॉलेजों में दाखिल हुए थे, वहीं पिछले साल यह संख्या बढ़कर 9 लाख तक पहुंच गई। इसी तरह महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा में भी दाखिलों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है—1400 से बढ़कर 2480 तक।
आईटीआई में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पिछले तीन वर्षों में आईटीआई की सीटों में 35,000 की वृद्धि की गई और पिछले साल 99% सीटें भर चुकी थीं। इस साल सरकार का लक्ष्य 5,000–7,000 नई सीटें जोड़ने का है।
युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
श्री बैंस ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार अब तक युवाओं को 54,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दे चुकी है। इससे न केवल बेरोजगारी घटी है बल्कि विदेश जाने की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगा है।
शिक्षा को बनाया गया प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी देश की इकलौती पार्टी है जिसने 2022 के विधानसभा चुनावों में शिक्षा को अपने मुख्य मुद्दों में से एक बनाया था। पंजाब सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है।
नए जमाने की पढ़ाई के लिए नए कोर्स
शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य में छात्रों को भविष्य के अनुसार तैयार करने के लिए डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बैंकिंग, डिजिटल मार्केटिंग, हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म और इवेंट मैनेजमेंट जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं।
साथ ही, अनुसूचित जातियों के छात्रों को छात्रवृत्ति भी समय पर दी जा रही है, ताकि कोई छात्र आर्थिक कारणों से पीछे न रह जाए।
प्रोफेसरों की हालत में सुधार
उन्होंने बताया कि तीन साल पहले कॉलेजों में 90% प्रोफेसर के पद खाली थे। कुछ गेस्ट फैकल्टी तो 20,000 रुपये की मामूली सैलरी पर काम कर रहे थे। मौजूदा सरकार ने इनका वेतन बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया है और रिक्त पदों को भरने के लिए योग्य प्रोफेसर भी नियुक्त किए गए हैं।
पंजाब बना विदेशी छात्रों की पसंद
श्री बैंस ने कहा कि आज पंजाब 70 देशों के विदेशी विद्यार्थियों की शिक्षा का केंद्र बन चुका है। इसके अलावा, विद्यार्थियों को उद्योग से जोड़ने और उन्हें नौकरी देने वाला बनाने के लिए बिज़नेस ब्लास्टर प्रोग्राम जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसमें छात्रों को सीड मनी और मेंटॉरशिप दी जाती है ताकि वे खुद का स्टार्टअप शुरू कर सकें।
यह स्पष्ट है कि पंजाब सरकार राज्य को एक वैश्विक शैक्षिक केंद्र बनाने के लक्ष्य पर गंभीरता से काम कर रही है। शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे ये प्रयास न सिर्फ युवाओं का भविष्य उज्जवल बनाएंगे, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को भी नई दिशा देंगे।
