बिहार में मतदाता सूची के विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ विपक्षी गठबंधन INDIA ने सोमवार को संसद भवन परिसर में विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, DMK, RJD, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों के नेता हाथों में पोस्टर और बैनर लिए नजर आए।
नारेबाजी और पोस्टर अभियान
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारे लगाए –
“वोट चोर, गद्दी छोड़” और “वोट चोरी रोको“।
सांसदों के हाथों में “Stop SIR” लिखे पोस्टर थे, जबकि “वोट चोरी” लिखा बड़ा बैनर भी लहराया गया। विपक्ष का आरोप है कि यह पूरा अभियान बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को वोटिंग अधिकार से वंचित करने की साजिश है।
CEC पर उठे सवाल
इसी बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेता नासिर हुसैन ने कहा कि विपक्ष हर लोकतांत्रिक रास्ता अपनाएगा ताकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता बनी रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की यह कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
संसद में गतिरोध जारी
विपक्षी दल लगातार संसद के दोनों सदनों में SIR मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलने पर कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। 21 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने के बाद से दोनों सदनों में कामकाज लगभग ठप पड़ा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार इस मुद्दे से भाग रही है और पारदर्शिता से बच रही है।
वोटरों को वंचित करने का आरोप
विपक्षी गठबंधन INDIA का दावा है कि SIR की आड़ में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की यह कार्रवाई सीधे तौर पर मताधिकार पर हमला है। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो विरोध और तेज होगा।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर सूची का यह विवाद केंद्र और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक टकराव बन गया है। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या चुनाव आयोग अपने फैसले पर कायम रहता है या फिर विपक्ष के दबाव में कोई बदलाव होता है।
