कनाडा और चीन के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्ते अब और गहराते दिख रहे हैं। शुक्रवार को कनाडा सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चीन की जानी-मानी सर्विलांस उपकरण निर्माता कंपनी हिकविजन (Hikvision) को देश में अपने सभी ऑपरेशंस बंद करने का आदेश दे दिया है। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरों को देखते हुए लिया गया है।
कनाडा की उद्योग मंत्री मेलोनी जोली ने जानकारी देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने हिकविजन के कामकाज को संभावित खतरा बताया है। उन्होंने साफ कहा कि “कनाडा में इस कंपनी का संचालन हमारे डिजिटल सिस्टम और नागरिकों की निजता के लिए खतरा बन सकता है।” इसलिए सरकार ने इसे रोकने का निर्णय लिया है।
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हिकविजन कौन है?
हिकविजन एक चीनी कंपनी है जो दुनिया भर में सीसीटीवी कैमरा और निगरानी उपकरण बनाती है। यह कंपनी कई देशों में सरकारी और निजी प्रोजेक्ट्स में तकनीकी सप्लाई करती है। लेकिन इसके प्रोडक्ट्स को लेकर अक्सर यह चिंता जताई जाती रही है कि इनका इस्तेमाल निगरानी, जासूसी और मानवाधिकार उल्लंघन में हो सकता है।
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पहले से विवादों में रही कंपनी
हिकविजन पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों की निगरानी में रही है।
अमेरिका पहले ही इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर चुका है।
यूरोपीय यूनियन ने भी इसके उपकरणों पर सवाल उठाए हैं।
आरोप है कि इसके कैमरों का इस्तेमाल चीन में उइगर मुसलमानों की निगरानी और उत्पीड़न के लिए किया गया है।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर अब कनाडा ने भी इस कंपनी पर पाबंदी लगाने का फैसला लिया है।
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चीन-कनाडा संबंधों में और खटास?
कनाडा और चीन के रिश्ते बीते कुछ सालों से लगातार तनाव में हैं।
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अब हिकविजन को लेकर लिया गया यह फैसला दोनों देशों के रिश्तों में एक और कूटनीतिक दरार ला सकता है। यह सिर्फ एक तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि कनाडा की ओर से एक स्पष्ट संदेश है कि वह अपनी डिजिटल सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
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चीन की क्या प्रतिक्रिया हो सकती है?
संभावना है कि चीन इस निर्णय को राजनीतिक प्रेरणा से लिया गया बता सकता है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और कूटनीतिक संवाद पर असर पड़ सकता है। कनाडा पहले भी चीन पर देश में गुप्त गतिविधियां और हस्तक्षेप करने का आरोप लगा चुका है।
कनाडा का यह कदम न सिर्फ तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने वाला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वह किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देता है और दुनिया के बाकी देश क्या रुख अपनाते हैं।
