अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’, जिसका निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है, मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष से प्रेरित बताई जाती है। फिल्म पहले ‘पंजाब 95’ नाम से चर्चा में रही और कई वर्षों तक सेंसर से जुड़े विवादों के कारण रिलीज नहीं हो सकी। इसके बाद इसे नए नाम ‘सतलुज’ के साथ OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया, लेकिन दो दिन के भीतर ही भारत में हटा लिया गया।
केंद्र सरकार ने बनाई अंतर-विभागीय समिति
फिल्म को OTT से हटाए जाने के बाद अब केंद्र सरकार ने इसके कंटेंट की समीक्षा के लिए एक अंतर-विभागीय (Inter-Departmental) समिति का गठन किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समिति फिल्म की सामग्री और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब फिल्म को हटाए जाने को लेकर देशभर में चर्चा जारी है।
रिलीज के बाद बढ़ा विवाद
‘सतलुज’ को बिना किसी बड़े प्रचार के ZEE5 पर रिलीज किया गया था। फिल्म को दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिलने लगी थी, लेकिन 48 घंटे के भीतर ही प्लेटफॉर्म ने इसे भारत में अनुपलब्ध कर दिया। ZEE5 ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के चलते फिल्म को फिलहाल हटाया गया है और उचित प्रक्रिया के माध्यम से इसे दोबारा उपलब्ध कराने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
फिल्म हटने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर लगातार बहस जारी है। कई राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और फिल्म से जुड़े लोगों ने इस फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। वहीं, फिल्म के समर्थकों का कहना है कि इस विषय पर खुली चर्चा होनी चाहिए, जबकि सरकार की ओर से गठित समिति अब फिल्म की सामग्री का परीक्षण करेगी और आगे की प्रक्रिया उसी के आधार पर तय हो सकती है।
