अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने ग्रीन कार्ड से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है, जिसका असर उन बच्चों पर पड़ेगा जो अपने माता-पिता की याचिकाओं के आधार पर ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं। नया नियम 15 अगस्त से लागू होगा। अब बच्चों की उम्र की गणना ‘अर्ज़ी दायर करने की तारीख’ के बजाय ‘अंतिम कार्रवाई की तारीख’ (Final Action Date) के आधार पर की जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि बच्चों को पहले से ही वयस्क मान लिया जाएगा, जिससे उनकी ग्रीन कार्ड पात्रता प्रभावित हो सकती है।
पुराने और नए नियम में बड़ा फर्क
पहले, जब माता-पिता की स्वीकृत याचिका पर बच्चा ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करता था, तो उसकी उम्र की गणना आवेदन दायर करने की तारीख से होती थी। लेकिन नए नियम के तहत यह गणना अंतिम कार्रवाई की तारीख से होगी। चूंकि ‘अंतिम कार्रवाई की तारीख’ आमतौर पर काफी देरी से आती है, इसलिए कई बच्चे 21 साल की उम्र पार कर सकते हैं और उनकी पात्रता समाप्त हो सकती है।
ग्रीन कार्ड के लिए उम्र सीमा का महत्व
अमेरिकी कानून के अनुसार, किसी अविवाहित विदेशी बच्चे की उम्र 21 साल से कम होनी चाहिए ताकि वह अपने माता-पिता की स्वीकृत याचिका के आधार पर स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) प्राप्त कर सके। यह नियम परिवार-प्रायोजित, रोज़गार-आधारित और डाइवर्सिटी वीज़ा सभी श्रेणियों में लागू होता है। यदि बच्चा 21 साल का हो जाता है, तो उसकी याचिका स्वतः अयोग्य हो जाती है और उसे नए सिरे से आवेदन करना पड़ता है, जिसमें कई वर्षों की लंबी प्रतीक्षा शामिल हो सकती है।
भारतीय परिवारों पर सबसे ज्यादा असर
यह बदलाव खासतौर पर भारत जैसे देशों के लिए चुनौतीपूर्ण है, जहां ग्रीन कार्ड के लिए पहले से ही लंबी प्रतीक्षा सूची है। अब ‘अंतिम कार्रवाई की तारीख’ के आधार पर उम्र की गणना होने से और देरी होगी, जिससे अधिक बच्चों की उम्र पात्रता सीमा से बाहर निकल सकती है। इससे भारतीय परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि उन्हें फिर से पूरी प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी।
भविष्य में असर और चिंताएं
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव तकनीकी दिख सकता है, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्तिगत और गहरा होगा। कई परिवार, जिन्होंने वर्षों तक इंतजार किया है, अब अपने बच्चों के 21 साल के होने से पहले ग्रीन कार्ड पाने की उम्मीद खो सकते हैं। इससे बच्चों की शिक्षा, करियर और भविष्य की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।
नए नियम के लागू होने से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में पहले से मौजूद देरी और बढ़ सकती है, खासकर उच्च मांग वाले देशों के लिए। इस बदलाव ने कई प्रवासी परिवारों के सामने नई अनिश्चितताएं खड़ी कर दी हैं, और अब उन्हें अपने बच्चों के लिए ग्रीन कार्ड की दौड़ में और सतर्क रहना होगा।
