उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बड़कोट-यमुनोत्री मार्ग पर एक बड़ी दुखद घटना सामने आई है। यहां सिलाई बैंड के पास एक निर्माणाधीन होटल में काम कर रहे मजदूरों के साथ हादसा हुआ। बीती रात हुई भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से यह हादसा हुआ। हादसे के बाद 29 मजदूर लापता हो गए थे, जिनमें से अब तक 20 को सुरक्षित निकाल लिया गया है। जबकि दो मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं। अभी भी 7 लोग लापता हैं, जिन्हें ढूंढने के लिए राहत और बचाव कार्य जारी है।
भूस्खलन से तबाही
सिलाई बैंड से पहले दो अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन हुआ है और एक जगह पर सड़क पूरी तरह से बह गई है। इस वजह से राहत कार्य में भी दिक्कतें आ रही हैं। भारी बारिश के चलते रास्ते बंद हो गए हैं और मशीनों को मौके तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
मुख्यमंत्री का बयान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा, “बड़कोट के पास बड़ा भूस्खलन हुआ है, जिसमें 29 लोग मलबे में फंस गए थे। 20 को सुरक्षित बचा लिया गया है और दो के शव बरामद हो चुके हैं। बाकी लोगों की तलाश की जा रही है।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई हैं। उन्होंने सभी जिला अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश भी दिया है।
चारधाम यात्रा पर असर
भारी बारिश और भूस्खलन के चलते चारधाम यात्रा को भी 24 घंटे के लिए रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि “मौसम ठीक होते ही यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। जो यात्री फंसे हुए हैं, उनके लिए खाने, रुकने और जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया जा रहा है।”
मौसम विभाग की चेतावनी
इस घटना के बाद मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक उत्तराखंड के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके चलते बचाव कार्य में और मुश्किलें आ सकती हैं। प्रशासन ने चारधाम यात्रा में लगे यात्रियों से अपील की है कि वे फिलहाल सुरक्षित स्थानों पर ही रुकें और मौसम सामान्य होने तक यात्रा ना करें।
क्या है सरकार की तैयारी
राज्य सरकार ने सभी जिलों के अधिकारियों को तैयार रहने को कहा है। सभी आपातकालीन सेवाओं को एक्टिव कर दिया गया है और राहत कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर भी स्टैंडबाय पर रखे गए हैं। सीएम धामी ने खुद हालात की समीक्षा की और अधिकारियों को हर जरूरी मदद करने का निर्देश दिया।
उत्तरकाशी की यह घटना उत्तराखंड के लिए एक चेतावनी है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम कब क्या करवट ले ले, कहा नहीं जा सकता। प्रशासन और सरकार राहत कार्य में जुटी है लेकिन मौसम की मार राहत कार्य में बड़ी चुनौती बन रही है। लोगों से अपील है कि वे सतर्क रहें और किसी भी अफवाह से बचें।
