पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक जनसभा के दौरान स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राज्य में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि सोमवार को सरकार ने पंजाब विधानसभा में एक नया बिल पेश किया है — “पंजाब धार्मिक ग्रंथों संबंधी अपराधों की रोकथाम बिल 2025”।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मुद्दा बेहद संवेदनशील और नाज़ुक है, जो हर पंजाबी की भावनाओं को गहराई से प्रभावित करता है। इसके दूरगामी प्रभाव ना सिर्फ वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी होंगे। भगवंत मान ने ज़ोर देते हुए कहा कि पवित्र ग्रंथों की बेअदबी जैसे घिनौने अपराधों को रोकने के लिए सख्त सज़ा बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब वह धरती है जहां महान गुरुओं, संतों और पैगंबरों ने जन्म लिया और जिन्होंने हमेशा प्यार, सहनशीलता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने दुख जताया कि 2016 से कुछ देशविरोधी ताकतें पवित्र ग्रंथों की बेअदबी की घटनाएं कर पंजाब की एकता को तोड़ने की साज़िश रच रही हैं।
भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार इन घटनाओं को बहुत गंभीरता से ले रही है और ऐसे अपराध करने वालों को मिसाल बनने वाली सज़ा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि पंजाब की धार्मिक आस्था की रक्षा का एक मजबूत कदम है।
उन्होंने कहा कि यह कानून सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों की गरिमा बनाए रखने के लिए है और इससे समाज में शांति और सद्भाव को बल मिलेगा। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे ऐसे मुद्दों पर एकजुट रहें और किसी भी अफवाह से सावधान रहें।
मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि यह कानून जल्द ही लागू किया जाएगा और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कर दिया कि पंजाब में धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनकी सरकार न सिर्फ कानून बना रही है, बल्कि उसे सख्ती से लागू भी करेगी — ताकि पंजाब की मिट्टी पर फिर कभी ऐसी घटनाएं दोहराई न जा सकें।
