पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्य के स्कूलों में नशा मुक्ति को लेकर नया विषय शुरू किया। इस पाठ्यक्रम की शुरुआत फाजिल्का जिले के अरणीवाला गांव के स्कूलों से की गई। इसका उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन देना है।
CM मान ने किया केजरीवाल के विज़न का समर्थन
इस अवसर पर संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अरविंद केजरीवाल की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि राजनीति को साफ-सुथरा बनाने के लिए केजरीवाल जी ने झाड़ू उठाया और दिखा दिया कि आम जनता के प्रतिनिधि भी व्यवस्था बदल सकते हैं। मान ने कहा कि सरकारी स्कूलों को सुधारने का जो अभियान दिल्ली में शुरू हुआ था, उसी मॉडल को अब पंजाब में अपनाया जा रहा है।
दुनियाभर से हो रही है मॉडल की सराहना
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब दिल्ली के सरकारी स्कूलों के परिणाम बेहतर आने लगे और इमारतें मॉडल बन गईं, तो दुनिया भर से लोग उन्हें देखने आने लगे। यहां तक कि स्कूलों तक पहुंचने के लिए दिल्ली सरकार को विशेष बसें तक चलानी पड़ीं। यही मॉडल अब पंजाब के बच्चों के लिए अपनाया जा रहा है।
‘युद्ध नशों के खिलाफ’ को मिली नई दिशा
भगवंत मान ने कहा कि पिछले डेढ़ दशक में लालची सरकारों के कारण पंजाब को “चिट्टे” (सिंथेटिक ड्रग्स) का कलंक झेलना पड़ा। यही नहीं, इस हालात पर कई फिल्में तक बन चुकी हैं। लेकिन अब समय बदल रहा है। हमारी सरकार ने ‘युद्ध नशों के खिलाफ’ नाम से अभियान शुरू किया है और स्कूल स्तर पर बच्चों को जागरूक करना इस मुहिम का अहम हिस्सा है।
कक्षा 9 से 12 तक लागू होगा नशा विरोधी सिलेबस
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को नशा विरोधी सिलेबस पढ़ाया जाएगा। इस पाठ्यक्रम में नशा मुक्ति केंद्रों के विशेषज्ञों, प्रभावशाली लोगों (इंफ्लुएंसर्स) की वीडियो, और जागरूकता सत्र शामिल होंगे। उन्हें स्कूलों में बुलाकर बच्चों को प्रत्यक्ष रूप से जागरूक किया जाएगा।
कोरे कागज़ सी उम्र को समय पर दिशा देना ज़रूरी
मान ने कहा कि 9वीं से 12वीं की उम्र कोरे कागज की तरह होती है, जिस पर जो लिख दिया जाए, वह भविष्य बन जाता है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को समय रहते बताया जाए कि नशा कितना घातक होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक बार नशा शरीर में चला गया तो उसे बाहर निकालने में कई साल लग सकते हैं।
एक चेतावनी और संदेश
पाठ्यक्रम में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि नशे का पहला प्रयोग ही जीवन के कई महत्वपूर्ण साल बर्बाद कर सकता है। इसलिए युवाओं को शुरू से ही इसके खिलाफ मानसिक रूप से तैयार करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल न केवल शिक्षा सुधार की दिशा में कदम है, बल्कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने की ओर एक ठोस प्रयास भी है।
