पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने “विकसित भारत उच्च शिक्षा विधेयक 2025” को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि यह विधेयक राज्यों के अधिकारों में दखल देने की कोशिश है। मुख्यमंत्री का कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राज्यों की भूमिका को कमजोर नहीं किया जा सकता।
दिल्ली से नहीं चलेंगे पंजाब के विश्वविद्यालय
मुख्यमंत्री मान ने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली के एसी कमरों में बैठकर पंजाब के विश्वविद्यालयों का संचालन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था, जरूरतें और चुनौतियां राज्य सरकार बेहतर तरीके से समझती है। इसलिए विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा से जुड़े फैसले लेने का अधिकार भी राज्यों के पास ही रहना चाहिए।
शिक्षा को व्यापार नहीं बनने देंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा को एक सेवा और अधिकार मानती है, न कि व्यापार। उन्होंने चिंता जताई कि यदि ऐसे प्रावधान लागू किए गए तो शिक्षा महंगी हो सकती है और आम परिवारों के लिए अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर वर्ग के विद्यार्थियों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती रहे।
युवाओं के भविष्य का मुद्दा
भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के युवाओं का भविष्य तय करने का अधिकार पंजाब को ही होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर “धक्केशाही” का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य के अधिकारों को कम करने वाली किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार शिक्षा और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज मजबूती से उठाती रहेगी।
