पंजाब सरकार ने महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (MGNREGA) का नाम बदलने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ आज विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। यह सत्र सुबह 11 बजे शुरू होगा। सरकार का कहना है कि यह फैसला न सिर्फ योजना की पहचान से जुड़ा है, बल्कि इससे लाखों ग्रामीण मजदूरों और कर्मचारियों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ सकता है।
सत्र से पहले ही दिखा विरोध का असर
विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही विरोध का माहौल देखने को मिला। कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह E.T.O. MGNREGA वर्कर्स के प्रोटेस्ट लेटर लेकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने बताया कि ये पत्र सदन में पेश किए जाएंगे, ताकि वर्कर्स की आवाज सीधे सरकार और विधायकों तक पहुंचे।
इसी तरह विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा भी वर्कर्स के विरोध पत्र अपने सिर पर रखकर विधानसभा पहुंचे। यह प्रतीकात्मक कदम वर्कर्स की चिंता और गुस्से को दिखाता है।
सैलरी और नौकरी जाने का डर
मंत्री हरभजन सिंह E.T.O. ने कहा कि MGNREGA स्कीम को कमजोर या खत्म किए जाने की आशंका से कर्मचारी बेहद परेशान हैं। उन्हें डर है कि अगर योजना पर असर पड़ा तो उनकी सैलरी और रोजगार दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। इसी चिंता के चलते बड़ी संख्या में MGNREGA कर्मचारी विधानसभा सत्र के दौरान चंडीगढ़ पहुंचे हैं।
पहली बार विधानसभा पहुंचेंगे MGNREGA कर्मचारी
यह पहला मौका होगा जब MGNREGA से जुड़े कर्मचारी बड़ी संख्या में विधानसभा पहुंचकर अपने नेताओं की सीधी बात सुनेंगे। कर्मचारी यह जानना चाहते हैं कि केंद्र सरकार के फैसले पर राज्य सरकार का क्या रुख है और उनके हक में कौन-से कदम उठाए जाएंगे।
वर्कर्स का कहना है कि वे सिर्फ विरोध दर्ज कराने नहीं, बल्कि अपनी समस्याएं और सुझाव भी विधायकों के सामने रखना चाहते हैं। वे सदन के बाहर विधायकों से मिलकर अपनी परेशानियां साझा करेंगे।
केंद्र बनाम राज्य की राजनीति
इस मुद्दे पर केंद्र और पंजाब सरकार आमने-सामने नजर आ रही हैं। पंजाब सरकार का मानना है कि MGNREGA जैसे महत्वपूर्ण रोजगार कार्यक्रम के नाम और स्वरूप से छेड़छाड़ करना ग्रामीण गरीबों के हितों के खिलाफ है। वहीं राज्य सरकार इस विशेष सत्र के जरिए केंद्र के फैसले का विरोध दर्ज कराना चाहती है।
वर्कर्स की नजर आज के सत्र पर
MGNREGA कर्मचारियों और मजदूरों की निगाहें आज के विधानसभा सत्र पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस सत्र के बाद उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस संदेश सामने आएगा। यह सत्र न सिर्फ एक राजनीतिक बहस है, बल्कि लाखों परिवारों की रोज़ी-रोटी से जुड़ा अहम मुद्दा भी बन चुका है।
