पीजीआई के एडवांस्ड आई सेंटर ने पहले से ही त्योहार के लिए विशेष इंतज़ाम किए थे। 20 अक्टूबर सुबह 8 बजे से 22 अक्टूबर सुबह 8 बजे तक डॉक्टरों, नर्सों और स्टाफ की 24 घंटे की विशेष ड्यूटी लगाई गई। इस दौरान पटाखों से 26 मरीज आंखों में चोट लेकर पहुंचे — इनमें 23 पुरुष और 3 महिलाएं थीं। चौंकाने वाली बात यह है कि 13 मरीज बच्चे थे, जिनकी उम्र 14 साल या उससे कम थी। सबसे छोटा बच्चा सिर्फ 3 साल का था।
पटाखे देखते हुए भी घायल हुए लोग
डॉ. फैसल के अनुसार, 15 मरीज पटाखे चलाते समय घायल हुए, जबकि 11 सिर्फ देखने के दौरान ही घायल हो गए। इनमें से चार लोगों की नजर 90 प्रतिशत तक कम हो गई है, जबकि दो की हालत गंभीर बताई गई है।
इन 26 में से 14 मरीज ट्राइसिटी से थे — 9 चंडीगढ़ और 5 मोहाली से। बाकी 12 मरीज पंजाब (8), हरियाणा (1) और हिमाचल प्रदेश (3) से आए।
किन पटाखों से हुई सबसे ज्यादा चोटें
रिपोर्ट के अनुसार, जिन पटाखों से हादसे हुए उनमें —
बम (11 केस), स्काई शॉट (4), रॉकेट (3), फुलझड़ी (1), पोटाश गन (1), और वैक्स कैंडल (1) शामिल थे। कुल 26 मरीजों में से 10 को सर्जरी की ज़रूरत पड़ी, जबकि बाकी को बंद ग्लोब (आंखों के अंदरूनी हिस्से की) चोटें आईं।
झुलसे सात मरीज, दो की हालत नाज़ुक
पीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में 7 झुलसे मरीजों को भर्ती किया गया। इनमें तीन के हाथ, एक के चेहरे पर गंभीर चोटें थीं। सभी का एडवांस्ड ट्रॉमा सेंटर में ऑपरेशन किया गया। एक मरीज को हल्की जलन के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि दो गंभीर रूप से झुलसे मरीजों का इलाज बर्न्स ICU में चल रहा है।
जीएमसीएच-32 में भी बढ़े मामले
सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (जीएमसीएच-32) में रविवार रात से सोमवार सुबह तक पटाखों से घायल 36 मरीज पहुंचे। इनमें 22 चंडीगढ़, 6 पंजाब, 4 हरियाणा, 3 हिमाचल और 1 अन्य राज्य से थे।
इनमें से 17 को आंखों की चोटें आईं, जबकि 19 को हाथ, चेहरा या शरीर पर जलन की शिकायत थी। 24 मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई, 6 को भर्ती किया गया और 5 को निगरानी में रखा गया।
कुल 193 लोग घायल, 53 को आंखों में चोट
जीएमएसएच-16 और अन्य सिविल अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार, दीवाली की रात 1,685 मरीज विभिन्न आपात स्थितियों के साथ पहुंचे। इनमें से 193 लोग पटाखों से झुलसे।
सबसे ज़्यादा 100 मरीज सेक्टर-16 अस्पताल में, 41 मनीमाजरा, 45 सेक्टर-45 और 7 सेक्टर-22 अस्पतालों में लाए गए। 53 लोगों की आंखें जख्मी हुईं — जिनमें से 8 को पीजीआई रेफर करना पड़ा। इसके अलावा, 20 सड़क हादसों के मामले भी दर्ज किए गए।
डॉक्टरों की चेतावनी: सावधानी ही सुरक्षा है
पीजीआई और जीएमसीएच के डॉक्टरों ने अपील की है कि त्योहारों के दौरान पटाखों का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा चश्मा पहनें, दूरी बनाए रखें और बच्चों को अकेले पटाखे न देने। उनका कहना है कि हर साल ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं, अगर लोग थोड़ी सी सतर्कता बरतें।
