पंजाब सरकार द्वारा पंजाब में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से गठित पंजाब रोड सेफ्टी फोर्स ने अपने दो साल पूरे कर लिए हैं। इस अवधि में फोर्स ने हाईवे पर होने वाले सड़क हादसों में मौतों को लगभग 50 प्रतिशत तक कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। तेज़ और पेशेवर प्रतिक्रिया के कारण यह मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
5 से 7 मिनट में घटनास्थल पर पहुंचती है फोर्स
एसएसएफ यानी सड़क सुरक्षा बल की सबसे बड़ी विशेषता उसका त्वरित रिस्पॉन्स है। हादसे की सूचना मिलते ही फोर्स की टीमें मात्र 5 से 7 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच जाती हैं और घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाती हैं। समय पर प्राथमिक सहायता और अस्पताल में भर्ती होने से सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा रही है।
एक साल में 940 जानें बचीं
आंकड़े इस सफलता की गवाही देते हैं। वर्ष 2023 में पंजाब के हाईवे पर सड़क दुर्घटनाओं में 1,955 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा घटकर 1,016 रह गया। यानी एक ही साल में 940 कीमती जानें बचाई गई। यह कमी एसएसएफ की त्वरित और समर्पित कार्रवाई का परिणाम मानी जा रही है।
1500 प्रशिक्षित जवान हर 30 किलोमीटर पर तैनाती
एसएसएफ के तहत लगभग 1,500 विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान फुल-टाइम तैनात किए गए हैं। उन्हें किसी ड्यूटी या अन्य कार्यों में नहीं लगाया जाता, ताकि उनका पूरा ध्यान सड़क सुरक्षा पर रहे। हाईवे पर हर 30 किलोमीटर की दूरी पर अत्याधुनिक उपकरणों से लैस एसएसएफ वाहन तैनात हैं, जो तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहते हैं।
पंजाब सरकार द्वारा पंजाब का यह रोड सेफ्टी मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। सूत्र बताते हैं की अन्य राज्य भी इस पहल को अपनाने के लिए संपर्क कर रहे हैं। एसएसएफ ने साबित किया है
कि समर्पित बल, आधुनिक संसाधन और त्वरित प्रतिक्रिया से सड़क हादसों में होने वाली मौतों को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है।
