दुनिया भर में निवेशक तेजी से क्रिप्टोकरेंसी की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन इसके भविष्य को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है। भारत में क्रिप्टो को लेकर सरकार का रुख शुरू से ही सतर्क रहा है। अब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की हालिया टिप्पणी के बाद यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है कि क्या देश में क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
RBI ने क्या कहा, क्यों बढ़ी चिंता?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, RBI के डिप्टी गवर्नर टी. रवि शंकर ने कहा है कि क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अंतिम फैसला केंद्र सरकार ही लेगी। उनका कहना है कि सरकार इस विषय पर क्रिप्टो इंडस्ट्री, बैंकिंग सेक्टर और अन्य सभी संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा करने के बाद ही कोई कदम उठाएगी।
“क्रिप्टो को मुद्रा नहीं कहा जा सकता”
डिप्टी गवर्नर रवि शंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को असली अर्थों में मुद्रा नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, इसमें मुद्रा की बुनियादी विशेषताएं नहीं हैं। उन्होंने क्रिप्टो को “सिर्फ कोड का एक टुकड़ा” बताते हुए कहा कि यह न तो वित्तीय संपत्ति है और न ही वास्तविक संपत्ति।
RBI ने गिनाईं क्रिप्टो की कमजोरियां
RBI के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी को मुद्रा न मानने के पीछे कई कारण हैं—
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इसका कोई आंतरिक मूल्य नहीं होता
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यह किसी भुगतान के वादे पर आधारित नहीं है
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इसका कोई आधिकारिक जारीकर्ता नहीं है
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इसकी कीमतें पूरी तरह अटकलों और सट्टेबाजी पर निर्भर करती हैं
युवाओं में तेजी से बढ़ रहा निवेश
RBI ने यह भी चिंता जताई कि भारत में क्रिप्टो निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, खासकर 18 से 25 साल के युवा इसमें सबसे आगे हैं। यही वजह है कि इसके जोखिमों को लेकर केंद्रीय बैंक ज्यादा सतर्क है।
भारत में क्रिप्टो की कानूनी स्थिति क्या है?
फिलहाल भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं है। इसमें ट्रेडिंग या लेन-देन अवैध नहीं है, लेकिन सरकार इस पर कड़ा टैक्स जरूर लगाती है। क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है।
सरकार को हो रही है बड़ी कमाई
दिलचस्प बात यह है कि क्रिप्टो से सरकार को अच्छा खासा राजस्व भी मिल रहा है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में क्रिप्टो एक्सचेंजों से करीब 1,100 करोड़ रुपये का TDS वसूला गया है।
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2022-23: 221.27 करोड़ रुपये
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2023-24: 362.70 करोड़ रुपये
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2024-25: 511.83 करोड़ रुपये
