पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक अहम बैठक के दौरान केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से राज्य के लंबित फंड्स और अनाज भंडारण से जुड़े मसलों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने बताया कि पंजाब को ग्रामीण विकास कोष (RDF) और मंडी शुल्क के रूप में 9000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अब तक जारी नहीं की गई है, जिससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर गंभीर असर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने इस फंड को ग्रामीण सड़कों, मंडी इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि कार्यों के लिए बेहद जरूरी बताया। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्र के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी पंजाब ने RDF एक्ट में संशोधन कर दिया था, इसके बावजूद खरीफ 2021-22 से अब तक यह फंड नहीं मिला है। भगवंत मान ने बताया कि 7737.27 करोड़ रुपये RDF और 1836.62 करोड़ रुपये मंडी शुल्क केंद्र के पास अटका हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राशि जारी न होने के कारण मंडी बोर्ड और ग्रामीण विकास बोर्ड अपने दायित्वों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। न सड़कों की मरम्मत हो रही है, न नए प्रोजेक्ट शुरू हो पा रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से जनहित में इन फंड्स को जल्द से जल्द रिलीज करने की अपील की।
उन्होंने यह भी बताया कि खरीफ सीजन 2024-25 के लिए राज्य में 117 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी का लक्ष्य है, लेकिन जून तक केवल 102 लाख मीट्रिक टन की डिलीवरी हो पाई है। जुलाई में 15 लाख मीट्रिक टन चावल की ढुलाई ज़रूरी है, नहीं तो आने वाले सीजन में चावल की खरीद में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने चावल के लिए उचित गोदाम और जगह की कमी का भी जिक्र किया और FCI को गेहूं के लिए प्रयोग हो रहे ढके गोदामों को चावल के लिए इस्तेमाल करने की सिफारिश की।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पंजाब सरकार ने इस बार धान की कटाई की तारीखें पहले कर दी हैं, इसलिए केंद्र को धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू करनी चाहिए। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में कोई दिक्कत नहीं होगी और नमी से संबंधित समस्याएं भी नहीं आएंगी।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पी.ई.जी. योजना के तहत भंडारण गोदामों की स्वीकृति में हो रही देरी पर चिंता जताई और 46 लाख मीट्रिक टन क्षमता को जल्द मंज़ूरी देने की मांग की। उन्होंने बताया कि राज्य ने 20 लाख मीट्रिक टन के लिए टेंडरिंग पूरी कर ली है, लेकिन FCI द्वारा सिर्फ 2.5 लाख मीट्रिक टन की मंजूरी दी गई है।
बी.आर.एल. स्टैकों से जुड़ी समस्याओं पर भी मुख्यमंत्री ने आवाज़ उठाई और कहा कि जब FCI ने स्टैक स्वीकार कर लिए हैं तो पूर्व में काटे गए भंडारण शुल्क को वापस किया जाना चाहिए।
अंत में मुख्यमंत्री ने विविध खर्चों की कम अदायगी के कारण हर साल राज्य के खजाने पर 1200 करोड़ रुपये का बोझ आने की बात कहते हुए केंद्र से अपील की कि खरीद कार्यों में हो रही वास्तविक लागत का भुगतान ईमानदारी से किया जाए।
यह बातचीत पंजाब के किसानों और ग्रामीण विकास को राहत पहुंचाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास मानी जा रही है।
