दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। राजधानी में प्रदूषण का स्तर लगातार गंभीर श्रेणी में बना हुआ है। बुधवार सुबह भी हालात में कोई सुधार नहीं दिखा। हवा में धुंध और धूल का घना मिश्रण देखने को मिला, जिससे लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें हो रही हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, आज सुबह कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार दर्ज किया गया, जो “वेरी पुअर” श्रेणी में आता है। वजीरपुर में AQI 327, पुसा में 297, शादिपुर में 253, मुंडका में 315, अशोक विहार में 301, द्वारका सेक्टर-8 में 308, रोहिणी में 320 और सिरीफोर्ट में 326 दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली के लगभग हर हिस्से में प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो चुका है। सुबह के समय दृश्यता घटने से ट्रैफिक पर असर पड़ा और कई इलाकों में लोग मास्क पहनकर ही बाहर निकले। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बुजुर्ग, बच्चे और अस्थमा के मरीज जितना हो सके घर के अंदर रहें।
प्रशासन ने लागू किए कड़े कदम
वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट को देखते हुए दिल्ली सरकार ने GRAP-2 (ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान-2) लागू कर दिया है। इसके तहत दिल्ली में नॉन-BS6 डीजल वाहनों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा निर्माण कार्यों, खुले में कचरा जलाने और औद्योगिक धुएं पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। पर्यावरण विभाग ने सड़कों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल को भी तेज किया है।
कृत्रिम बारिश का परीक्षण
प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए दिल्ली सरकार ने 53 साल बाद कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) का प्रयोग किया। इस प्रयोग में भारतीय मौसम विभाग (IMD) और आईआईटी कानपुर की टीम ने भाग लिया। मंगलवार को किए गए इस परीक्षण का उद्देश्य यह देखना था कि कम नमी वाले वातावरण में बारिश कराने की तकनीक कितनी कारगर है।
हालांकि, इस बार दिल्ली में बारिश नहीं हो पाई क्योंकि हवा में नमी केवल 10 से 15 प्रतिशत थी, जो कृत्रिम बारिश के लिए पर्याप्त नहीं मानी जाती। आईएमडी के अनुसार, अगर अगले कुछ दिनों में नमी का स्तर बढ़ता है, तो कृत्रिम बारिश से प्रदूषण में कुछ हद तक राहत मिल सकती है।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रयोग जारी रहेगा। जैसे ही मौसम अनुकूल होगा, विमान से पुनः परीक्षण किया जाएगा। उनका कहना है कि अगर प्रयोग सफल हुआ, तो इस तकनीक का इस्तेमाल दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अभी प्रदूषण कम होने में समय लगेगा। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं, सर्द मौसम और धीमी हवाएं दिल्ली की हवा को और भारी बना रही हैं। जब तक ठंडी हवाएं उत्तर से नहीं चलतीं, तब तक प्रदूषक तत्व ऊपर नहीं उठ पाते।
फिलहाल दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता “बेहद खराब” बनी हुई है। सरकार और वैज्ञानिक एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन तत्काल राहत की संभावना कम है। आने वाले कुछ दिनों तक दिल्लीवासियों को प्रदूषण से बचने के लिए मास्क पहनना, घर के अंदर रहना और अनावश्यक यात्रा से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
