भारत में सरकारी तेल कंपनियां (फ्यूल रिटेलर) इस समय पेट्रोल और डीजल बेचकर नुकसान उठा रही हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार, कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹20 प्रति लीटर और डीजल पर ₹100 प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है।
यह नुकसान इसलिए हो रहा है क्योंकि कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से कीमतें नहीं बढ़ा रही हैं और ग्राहकों को राहत देने के लिए पुराने रेट पर ही ईंधन बेच रही हैं।
ईरान युद्ध और महंगा हुआ कच्चा तेल
इस नुकसान की सबसे बड़ी वजह है ईरान और पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव। इस वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत पहले करीब $70 प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर $110–$113 प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
होर्मुज स्ट्रेट में संकट और सप्लाई में रुकावट के कारण पूरी दुनिया में तेल महंगा हो गया है, जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है।
कीमतें क्यों नहीं बढ़ा रही सरकार?
इतने बड़े नुकसान के बावजूद सरकार ने अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं।
सरकार का मुख्य उद्देश्य आम जनता को महंगाई से बचाना है। अगर कीमतें बढ़ाई जाती हैं, तो इसका असर सीधे ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ेगा।
सरकार पहले ही एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर चुकी है ताकि लोगों पर बोझ कम रहे।
कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव
लगातार नुकसान के कारण तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो कंपनियों के लिए इस नुकसान को सहना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में भविष्य में कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
आगे क्या हो सकता है असर
अगर ईरान युद्ध और वैश्विक तनाव जारी रहता है, तो:
- कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं
- ईंधन सप्लाई पर असर पड़ सकता है
- महंगाई बढ़ने का खतरा बना रहेगा
