पंजाब की 11 राजनीतिक पार्टियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। चुनाव आयोग ने इन सभी दलों को चुनावी खर्च और ऑडिट रिपोर्ट समय पर जमा न कराने के मामले में कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) जारी किया है। आयोग ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इन पार्टियों की मान्यता और पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
लगातार तीन साल नहीं जमा हुई रिपोर्टें
मुख्य चुनाव अधिकारी, पंजाब द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि इन 11 दलों ने लगातार तीन वित्तीय वर्षों—2021-22, 2022-23 और 2023-24—की सालाना ऑडिट रिपोर्टें आयोग को उपलब्ध नहीं कराईं। इसके अलावा, इन दलों ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हिस्सा लेने के बावजूद निर्धारित फॉर्मेट में चुनावी खर्च का ब्योरा भी प्रस्तुत नहीं किया।
आयोग की सख्त चेतावनी
नोटिस में साफ कहा गया है कि सभी पार्टियों को 10 अक्तूबर तक लिखित जवाब देना होगा और 17 अक्तूबर को चुनाव आयोग के सामने पेश होना होगा। आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक कोई जवाब नहीं मिला, तो इसे मान लिया जाएगा कि पार्टी के पास कहने के लिए कुछ नहीं है। ऐसे में आयोग सीधे पंजीकरण रद्द करने का आदेश पारित कर देगा।
किन पार्टियों पर गिरी गाज?
जिन 11 पार्टियों को नोटिस भेजा गया है, उनमें शामिल हैं:
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शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) – सिमरनजीत सिंह मान
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अपना समाज पार्टी
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बहुजन समाज पार्टी (अंबेडकर)
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डेमोक्रेटिक भारतीय समाज पार्टी
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डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (अंबेडकर)
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जय जवान जय किसान पार्टी
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जनरल समाज पार्टी
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समाज अधिकार कल्याण पार्टी
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सहजधारी सिख पार्टी
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अपना पंजाब पार्टी
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शिरोमणि लोक दल पार्टी
राजनीतिक भविष्य पर सवाल
इन दलों को अब तय समय सीमा के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयोग ने सख्त कदम उठाया, तो यह छोटी और क्षेत्रीय पार्टियों के लिए राजनीतिक अस्तित्व का संकट साबित हो सकता है।
इस मामले ने पंजाब की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, और अब सबकी निगाहें 17 अक्तूबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
