प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को जापान पहुंचे और अपने समकक्ष शिगेरू इशिबा के साथ शिखर वार्ता की। इस मुलाकात का उद्देश्य भारत-जापान संबंधों को नई ऊंचाई देना और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाना रहा। मोदी की यह दो दिवसीय यात्रा दिल्ली और टोक्यो के रिश्तों को और गहरा करने के लिहाज़ से अहम मानी जा रही है।
फैक्ट्रियों का दौरा और बुलेट ट्रेन प्रोटोटाइप
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री चार प्रमुख फैक्ट्रियों का दौरा करेंगे। इनमें सबसे खास वह इकाई है जहां E10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार किया जा रहा है। भारत भविष्य में इस ट्रेन को खरीदने पर विचार कर रहा है। इससे दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचा और परिवहन सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
बिजनेस फोरम को संबोधित किया
शिखर वार्ता से पहले पीएम मोदी ने टोक्यो में आयोजित इंडिया-जापान बिजनेस फोरम को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि “जापान की तकनीक और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सकती है।” मोदी ने उद्यमियों को भरोसा दिलाया कि भारत नवाचार और निवेश को लेकर जापानी कंपनियों का स्वागत करता है।
रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
वार्ता के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 साल के लिए एक सहयोगी रोडमैप तैयार किया। इसमें तकनीक, रक्षा, सुरक्षा और व्यापार जैसे अहम क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई। मोदी ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में भारत और जापान को एक-दूसरे की ताकत का सही इस्तेमाल करना होगा।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अहम यात्रा
मोदी की यह जापान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और टैरिफ नीतियों से भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव देखने को मिला है। ऐसे में भारत और जापान की साझेदारी को एक स्थिर और भरोसेमंद विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
अगला पड़ाव चीन का तियानजिन
जापान यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को चीन के तियानजिन शहर जाएंगे। यहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस बहुपक्षीय मंच पर भी भारत अपनी भूमिका और सहयोग को और मज़बूत करने का प्रयास करेगा।
