पंजाब ने इतिहास रचते हुए पहली बार बच्चों की विधानसभा सत्र का आयोजन किया है। यह खास सत्र श्री आनंदपुर साहिब में आयोजित किया गया, जहां पंजाब के सरकारी स्कूलों के बच्चों ने विधायकों, मंत्रियों और यहां तक कि मुख्यमंत्री की भूमिका निभाई। संविधान दिवस के मौके पर हुआ यह आयोजन लोकतंत्र की सीख देने का एक अनोखा प्रयास बन गया।
117 विधानसभा क्षेत्रों के बच्चों ने संभाली जिम्मेदारी
इस विशेष सत्र में पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से चुने गए छात्रों ने हिस्सा लिया। ये छात्र 11वीं और 12वीं कक्षा के हैं और इन्हें मंत्री, विधायक, स्पीकर और मुख्यमंत्री जैसी जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
सभी विद्यार्थी एकदम वास्तविक विधायकों की तरह विधानसभा में चर्चा करते और मुद्दे उठाते नजर आए। माहौल इतना वास्तविक था कि देखने वालों को यह एक सच्ची विधानसभा सत्र जैसा ही लगा।
छात्रों को मिली विशेष ट्रेनिंग
इस सत्र से पहले बच्चों को 19 नवंबर को विशेष प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे विधानसभा की कार्यप्रणाली को समझ सकें।
जानकारी के मुताबिक—
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संगरूर जिले के स्कूल ऑफ एमिनेंस, घनौरी कलां के हरकमल सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की भूमिका निभाई।
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छाजली के लखबीर सिंह ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की भूमिका निभाई।
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सुनाम के छात्र अनिक मैरी ने कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा का किरदार निभाया।
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बंगा के मोहित सिंह ने कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल की भूमिका निभाई।
इन सभी छात्रों ने पूरी गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
लोकतंत्र का अनोखा पाठ
सत्र की शुरुआत होते ही छात्र विधायकों की तरह बहस में हिस्सा लेते, सवाल पूछते और समाधान सुझाते दिखे। यह पहली बार था जब पंजाब विधानसभा में ऐसा अनोखा नज़ारा देखने को मिला।
विद्यार्थियों ने वास्तविक मुद्दों पर चर्चा की और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को करीब से समझा।
राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने की पहल
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि यह पंजाब में अपनी तरह का पहला सत्र है, जिसका उद्देश्य छात्रों को लोकतांत्रिक मूल्यों की गहरी समझ देना है।
उनके अनुसार—
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यह पहल बच्चों को राजनीतिक जागरूकता देगी
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उनमें कानून और संविधान के प्रति सम्मान बढ़ेगा
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वे जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बन सकेंगे
भविष्य के नेताओं की तैयारी
इस विशेष सत्र ने यह साबित किया है कि बच्चों को सही मार्गदर्शन और अनुभव दिया जाए तो वे किसी भी बड़ी जिम्मेदारी को समझ सकते हैं। पंजाब सरकार की इस पहल ने बच्चों के भीतर नेतृत्व क्षमता को निखारने का एक सुनहरा मौका दिया है।
यह आयोजन न सिर्फ ऐतिहासिक रहा बल्कि पंजाब के शिक्षा मॉडल में एक नई ऊंचाई भी जोड़ गया है।
