अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। पिछले कुछ महीनों में सोने का भाव 2,200-2,500 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 3,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है। इस उछाल ने दुबई के ज्वेलरी सेक्टर पर गहरा असर डाला है।
भारतीय व्यापारियों के लिए बढ़ी मुश्किलें
दुबई, जो सोने का वैश्विक हब माना जाता है, वहां बड़ी संख्या में भारतीय ज्वेलरी कारोबारी सक्रिय हैं। बढ़ती कीमतों ने उनके व्यापार की लागत को बढ़ा दिया है और उपभोक्ताओं की मांग घटा दी है। इस वजह से कारोबार की गति धीमी हो गई है और व्यापारी नई रणनीतियों पर विचार करने को मजबूर हो रहे हैं।
बाफलेह ज्वेलरी की नई रणनीति
पश्चिम एशिया में भारतीय आभूषणों के सबसे बड़े आयातकों में से एक, बाफलेह ज्वेलरी ने बदलते हालात के मुताबिक कदम उठाना शुरू कर दिया है। कंपनी अब हल्के डिजाइन और कम कैरेट वाले गहनों की ओर बढ़ रही है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रमेश वोरा के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में भारत से करीब 600-700 किलोग्राम गहनों का आयात किया गया है, जबकि पिछले पूरे साल यह आंकड़ा 1.2 टन था।
कीमतें बढ़ीं, पर मात्रा घटी
वोरा ने बताया कि भले ही आयात मूल्य बढ़ा है, लेकिन गहनों की मात्रा में 20-30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। उनका मानना है कि सोने की कीमत आगे चलकर 4,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यही कारण है कि कंपनी अगले महीने 14 कैरेट के गहने पेश करने की योजना बना रही है। इसके लिए वे कोलकाता और दिल्ली के सप्लायरों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि कम सोने का इस्तेमाल करते हुए भी रंग और गुणवत्ता बनाए रखी जा सके।
रोजाना कीमतों में उतार-चढ़ाव
ज्वेलरी आयातकों का कहना है कि सोने की अस्थिर कीमतें बड़ी चुनौती हैं। रोजाना 50 डॉलर तक का उतार-चढ़ाव उनके कारोबार पर सीधा असर डालता है। इस वजह से व्यापारियों को लगातार अपनी रणनीतियों में बदलाव करना पड़ रहा है।
भारतीय कारीगरी की दुनिया में पहचान
वोरा ने यह भी कहा कि भारतीय गहनों की खासियत उनकी कारीगरी है। उन्होंने इटली, तुर्किये, सिंगापुर और इंडोनेशिया जैसे देशों के मशीन से बने गहनों की तुलना करते हुए कहा कि हाथ से बने भारतीय गहनों का कोई मुकाबला नहीं। उन्होंने दावा किया कि भारतीय गहने आज भी दुनिया भर में उपभोक्ताओं की पहली पसंद बने हुए हैं।
सोने की बढ़ती कीमतों ने दुबई के ज्वेलरी बाजार को हिला दिया है। हालांकि चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन भारतीय व्यापारियों की कारीगरी और नई रणनीतियां इस संकट को अवसर में बदल सकती हैं।
