देश में सोने पर लोन लेने की प्रवृत्ति तेज़ी से बढ़ रही है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में दिए गए एक लिखित उत्तर में बताया कि मई 2024 तक देश में कुल गोल्ड लोन की राशि 1.16 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है। यह ट्रेंड दर्शाता है कि महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के चलते आम लोग सोना गिरवी रखकर जरूरतें पूरी कर रहे हैं।
महंगाई और आर्थिक दबाव बना बड़ा कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि जब महंगाई का स्तर ऊंचा होता है, तो आम लोग अपनी बचत में सेंध लगाए बिना गोल्ड लोन को प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा, मौजूदा फिनटेक कंपनियों ने लोन लेने की प्रक्रिया को आसान और त्वरित बना दिया है, जिससे ज्यादा लोग इस विकल्प की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अब कम सोना गिरवी रखने पर भी ज्यादा लोन मिल रहा है।
विदेशी शिक्षा लोन में 25.2% की गिरावट
जहां एक ओर गोल्ड लोन में उछाल आया है, वहीं विदेशों में पढ़ाई के लिए लिए जाने वाले एजुकेशन लोन में भारी गिरावट देखी गई है। RBI के LRS (Liberalized Remittance Scheme) आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों में कुल 2,663.05 करोड़ रुपये ही विदेश भेजे गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 3,561.5 करोड़ रुपये था। यह लगभग 25.2% की गिरावट को दर्शाता है।
विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में भी गिरावट
एजुकेशन लोन की मांग में गिरावट के पीछे एक बड़ा कारण विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या में आ रही कमी है। वर्ष 2024 में लगभग 13.5 लाख भारतीय छात्र विदेश गए थे, लेकिन वर्ष 2025 में यह आंकड़ा गिरकर लगभग 10 लाख के आस-पास रहने की संभावना है।
अमेरिका की लोकप्रियता में कमी, जर्मनी और रूस की ओर रुख
अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में भी भारी गिरावट देखी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या 3.48 लाख से गिरकर 2.55 लाख तक पहुंच सकती है। इसके विपरीत, जर्मनी जाने वाले छात्रों की संख्या में 40% और रूस जाने वालों में 33% की वृद्धि दर्ज की गई है।
भविष्य में एजुकेशन लोन की मांग बढ़ने की उम्मीद
हालांकि, मौजूदा गिरावट के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एजुकेशन लोन की मांग में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है, विशेषकर उन देशों में जो कम लागत और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दे रहे हैं।एक तरफ जहां गोल्ड लोन आम लोगों के लिए त्वरित समाधान बनकर उभरा है, वहीं विदेश शिक्षा के लिए लोन में गिरावट एक चिंताजनक संकेत है। यह न केवल वैश्विक परिस्थितियों को दर्शाता है बल्कि छात्रों के बदलते रुझानों का भी संकेत देता है।
