पंजाब सरकार राज्य में अनाज के भंडारण के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित करने को लेकर लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे को प्राथमिकता दे रही है, क्योंकि इसका सीधा संबंध किसानों से होने वाली खरीद प्रक्रिया और खाद्यान्न प्रबंधन से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार का कहना है कि भंडारण क्षमता बढ़ाने और मौजूदा स्टॉक के बेहतर प्रबंधन के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया मामला
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने एक समीक्षा बैठक के दौरान बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कई अवसरों पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी के साथ बैठकें की हैं। इन बैठकों में पंजाब में भंडारण स्थान की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार केंद्र सरकार को इस स्थिति से अवगत कराती रही है और भविष्य में भी इस विषय को मजबूती से उठाया जाएगा।
उपलब्ध स्थान से अधिक भरा हुआ है अनाज
बैठक के दौरान मंत्री ने बताया कि वर्तमान में पंजाब के पास लगभग 181 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) भंडारण क्षमता उपलब्ध है। हालांकि, इस समय गोदामों और अन्य भंडारण स्थलों में करीब 190 लाख मीट्रिक टन अनाज रखा हुआ है। इसका मतलब है कि उपलब्ध क्षमता का लगभग 105 प्रतिशत उपयोग हो चुका है। यह स्थिति बताती है कि राज्य में भंडारण व्यवस्था पर काफी दबाव है और जल्द समाधान की आवश्यकता है।
गेहूं और चावल का बड़ा स्टॉक
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में इस समय चावल का पिछला स्टॉक 37.76 लाख मीट्रिक टन है, जबकि गेहूं का स्टॉक करीब 40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है। बड़ी मात्रा में मौजूद यह अनाज आने वाले महीनों में भंडारण व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। इसलिए अनाज की नियमित निकासी और परिवहन को बेहद जरूरी माना जा रहा है।
अगले चार महीने होंगे बेहद महत्वपूर्ण
लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि हालात को सामान्य बनाए रखने के लिए पंजाब से हर महीने कम से कम 10 लाख मीट्रिक टन चावल और 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं की लिफ्टिंग होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि आने वाले चार महीने इस दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे। यदि निर्धारित मात्रा में अनाज की निकासी होती रही तो भंडारण पर दबाव कम किया जा सकेगा और आगामी खरीद सीजन के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो पाएगी।
कृषि प्रधान राज्य होने के कारण बढ़ी जिम्मेदारी
मंत्री ने कहा कि पंजाब देश के प्रमुख कृषि राज्यों में शामिल है और यहां की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खेती पर आधारित है। ऐसे में कृषि और खाद्यान्न प्रबंधन से जुड़े हर मुद्दे को सरकार गंभीरता से लेती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों, एजेंसियों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्षों के हितों की रक्षा के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
इस समीक्षा बैठक में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें प्रमुख सचिव राहुल तिवारी, अतिरिक्त सचिव कमल कुमार गर्ग, अतिरिक्त निदेशक डॉ. अंजुमन भास्कर, अजयवीर सिंह सराओ तथा जीएम (वित्त) सरवेश कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। बैठक में भंडारण क्षमता, अनाज की लिफ्टिंग और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
