पंजाब के शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains ने दिल्ली के मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि “न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए”, और यह सिर्फ एक विचार नहीं बल्कि कानून की बुनियाद है।
फैसले को बताया अंतरात्मा की आवाज
हरजोत बैंस ने कहा कि जब न्यायिक प्रक्रिया में यह मूल सिद्धांत पूरा न हो, तो उसमें हिस्सा न लेना कमजोरी नहीं बल्कि अंतरात्मा की आवाज है। उन्होंने केजरीवाल के इस फैसले को सिद्धांतों पर आधारित कदम बताते हुए सराहना की।
केजरीवाल का पक्ष
केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पूरी विनम्रता और न्यायपालिका के प्रति सम्मान रखते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि गांधीवादी सिद्धांत ‘सत्याग्रह’ को अपनाते हुए वह इस केस में उनके कोर्ट में आगे पेश नहीं होंगे।
अदालत में पेश न होने का कारण
केजरीवाल का कहना है कि उन्होंने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि उन्हें लगा कि कोर्ट में चल रही सुनवाई उस बुनियादी सिद्धांत को पूरा नहीं करती, जिसमें न्याय का दिखना भी उतना ही जरूरी है जितना उसका होना।
कानूनी प्रक्रिया पर सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि इस स्थिति में अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लेना किसी भी तरह से सार्थक परिणाम नहीं देगा। चाहे वह खुद पेश हों या उनके वकील, उन्हें उम्मीद नहीं है कि इससे कोई सकारात्मक निष्कर्ष निकलेगा।
