पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक के मामलों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इसके साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े विषयों का भी उल्लेख किया गया।
पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा
हरपाल चीमा ने कहा कि प्रस्ताव में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताई गई है। उन्होंने कहा कि युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया मिलनी चाहिए। उनके अनुसार रोजगार से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि उम्मीदवारों का विश्वास बना रहे।
युवाओं और सोनम वांगचुक का भी किया जिक्र
वित्त मंत्री ने बताया कि प्रस्ताव में न्याय की मांग कर रहे युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े कार्यों के लिए जाने जाने वाले सोनम वांगचुक के साथ हुए व्यवहार पर भी आपत्ति जताई गई। प्रस्ताव में इन घटनाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा विषय बताते हुए चिंता व्यक्त की गई।
मामले वापस लेने की मांग
प्रस्ताव के माध्यम से युवाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने की मांग भी की गई। हरपाल चीमा ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार सभी नागरिकों को होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनहित और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
