हरियाणा के वरिष्ठ IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल पैदा कर दी है। 8 अक्टूबर को सेक्टर-11, चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर पूरन कुमार ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने अपने 9 पन्नों के नोट में हरियाणा के वर्तमान DGP शत्रुजीत कपूर और मुख्य सचिव सहित 15 अधिकारियों के नाम लिखे और आरोप लगाया कि उन्हें जाति के आधार पर परेशान किया जा रहा था।
FIR में नई धारा का समावेश
पूरन कुमार के परिवार की मांग पर चंडीगढ़ पुलिस ने देर रात FIR में अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (SC/ST Act) की नई धारा 3(2)बी को जोड़ा। परिवार का कहना था कि पहले FIR में SC/ST Act जरूर शामिल था, लेकिन उसमें सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही थी। नई धारा के तहत दोषी को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा दी जा सकती है। इससे पहले दर्ज धाराओं में अधिकतम सजा केवल 5 साल तक की थी।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जांच
चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस इस मामले की गहन जांच में जुटी है। FIR में नई धारा जोड़ने का उद्देश्य परिवार की न्याय की मांग को पूरा करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
पूरन कुमार की आत्महत्या ने न केवल प्रशासनिक तंत्र में सवाल खड़े किए हैं बल्कि समाज में जाति आधारित भेदभाव और पुलिस विभाग में मानसिक दबाव पर भी ध्यान आकर्षित किया है। इस मामले की जांच जारी है और राज्य सरकार ने भी वरिष्ठ अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष और तेज़ जांच सुनिश्चित की जाए।
पूरन कुमार की आत्महत्या ने पुलिस विभाग और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और कर्मचारियों के अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा पर ध्यान देना अत्यावश्यक है।
