पंजाब लंबे समय से एक अदृश्य जंग लड़ रहा है — नशे के खिलाफ। इस जंग का सबसे खतरनाक हथियार रहा है पाकिस्तान से आने वाला ड्रोन। रात के अंधेरे में यह मशीनें सरहद पार करतीं, और अपने साथ लातीं जहर के पैकेट, जो पंजाब की गलियों और युवाओं की जिंदगी में घुल जाते।
‘नशे के विरुद्ध युद्ध’ का नया मोर्चा
अरविंद केजरीवाल ने इस बार पंजाब के लिए एक सख्त संदेश दिया — अब कोई भी ड्रोन सरहद पार नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि “आज नशे के खिलाफ हमारी लड़ाई में एक नया अध्याय जुड़ गया है।” उनके अनुसार, पुरानी सरकारों ने तस्करों को संरक्षण देकर युवाओं को बरबादी की ओर धकेल दिया। पंजाब की जवानी, जो खेतों में सुनहरे कल की फसल बो सकती थी, नशे की गिरफ्त में चली गई।
ड्रोन रोकने की तैयारी
केजरीवाल के मुताबिक, पंजाब में बिकने वाला ज्यादातर नशा पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आता है। सीमा के पास उतरने वाले इन पैकेटों को स्थानीय नेटवर्क बाजार में पहुंचाता है। अब इसे खत्म करने के लिए सरकार ने एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाया है। शुरुआती चरण में तीन सिस्टम काम में आ चुके हैं, जबकि कुल नौ का ऑर्डर दिया गया है। आने वाले समय में बाकी छह भी तैनात होंगे। जरूरत पड़ने पर और सिस्टम खरीदे जाएंगे।
देश में पहला कदम
केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि पूरे भारत में पंजाब पहला राज्य है, जिसके पास अपना एंटी-ड्रोन सिस्टम है। इसका मतलब है कि अब सीमा पर आने वाले किसी भी ड्रोन को तुरंत पहचानकर वहीं गिरा दिया जाएगा। यह कदम न सिर्फ नशे के धंधे पर रोक लगाएगा, बल्कि पंजाब के लोगों में यह भरोसा भी पैदा करेगा कि अब वे असहाय नहीं हैं।
नशामुक्त पंजाब का सपना
“हम पंजाब के तीन करोड़ लोगों के साथ मिलकर नशे को जड़ से खत्म करेंगे,” केजरीवाल ने कहा। उनका मानना है कि इस जंग में संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। अब जब ड्रोन का रास्ता बंद होगा, तो तस्करों की सप्लाई लाइन टूट जाएगी। इससे पंजाब के गांव, कस्बे और शहर नशे के पंजे से आज़ाद हो सकेंगे।
सीमा पर लगे नए उपकरण सिर्फ मशीनें नहीं हैं, बल्कि एक संदेश हैं — कि पंजाब अब चुप नहीं बैठेगा। बीते वर्षों की गलतियों से सीखते हुए, सरकार अब युवाओं के लिए नई सुबह लाने का दावा कर रही है। खेतों में फिर से उम्मीद के बीज बोए जा सकें, इसके लिए हवा में मंडराते खतरों को पहले ही गिराना जरूरी है। और पंजाब ने इस दिशा में एक ठोस कदम रख दिया है।
