1 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत अच्छी तेजी के साथ हुई, लेकिन दिन के अंत तक यह बढ़त कुछ हद तक कम हो गई। BSE सेंसेक्स आज 90.83 अंक चढ़कर 83,697.29 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 24.75 अंकों की बढ़त रही और यह 25,541.80 के स्तर पर बंद हुआ। दिन के दौरान सेंसेक्स ने एक समय 250 अंकों से अधिक की तेजी के साथ 83,874.29 का स्तर भी छू लिया था।
तीन महीनों में ऐतिहासिक तेजी
पिछले तीन महीनों में भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है। सेंसेक्स ने लगभग 12,000 अंकों की छलांग लगाई है और BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 72 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 461 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि ये तेजी एक तरफ निवेशकों के लिए मुनाफे का मौका बनी, वहीं दूसरी ओर कुछ चिंताएं भी लेकर आई है, खासतौर पर उन निवेशकों के लिए जो अब बाजार में नई एंट्री के मौके तलाश रहे हैं।
वैल्यूएशन पर चिंता
बाजार की इस ऊंची उड़ान ने वैल्यूएशन और कंपनियों के असली फंडामेंटल्स के बीच एक अंतर पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार अपनी वास्तविक क्षमता से ऊपर पहुंच गया है और इस वजह से अब निवेश जोखिमभरा हो सकता है।
JM फाइनेंशियल के वेंकटेश बालासुब्रमण्यम के अनुसार, “बाजार की मौजूदा रैली पूरी तरह तरलता पर आधारित है।” उन्होंने बताया कि निवेशक अब वैल्यूएशन के मुकाबले ज्यादा कीमतों पर शेयर खरीद रहे हैं, जिससे आगे चलकर करेक्शन (गिरावट) का खतरा बना हुआ है।
DIIs और FIIs की भूमिका
घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बीते कुछ महीनों में करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भी लगातार खरीदारी जारी रखी है, जिससे बाजार में स्थिरता बनी हुई है।
म्यूचुअल फंड्स के पास भी मई महीने में करीब 2.17 लाख करोड़ रुपये की नकदी थी और SIP के माध्यम से हर महीने 26,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रवाह हो रहा है।
अब कहां करें निवेश?
विशेषज्ञों का कहना है कि आगे बाजार में ज्यादा रिटर्न केवल कंपनियों की कमाई में वास्तविक बढ़त पर ही निर्भर करेगा। कोटक AMC के नीलेश शाह का कहना है कि अगले कुछ सालों में बीते पांच साल जैसे रिटर्न की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। बाजार अब काफी महंगा हो चुका है और निवेशकों को इक्विटी के साथ-साथ अन्य विकल्पों जैसे REITs, InvITs, डेट म्यूचुअल फंड्स, सोना और ETFs में भी निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
तरलता से फायदे में वित्तीय क्षेत्र
हाल ही में RBI द्वारा की गई नीतिगत दरों में कटौती और CRR में बदलाव के चलते बाजार में तरलता (liquidity) बढ़ गई है। इसका सबसे बड़ा फायदा वित्तीय क्षेत्र को मिला है। क्वांटास रिसर्च के कार्तिक जोनागडला का कहना है कि PFC और REC जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनियों में निवेश का अच्छा मौका है। इसके अलावा PSU बैंकों का इंडेक्स भी 6 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार में तेजी बनी हुई है लेकिन निवेशकों को अब ज्यादा सावधानी से कदम रखने की जरूरत है। वैल्यूएशन का स्तर ऊंचा है, और मुनाफे की उम्मीद अब कंपनियों की असली कमाई पर निर्भर करेगी। विवेकपूर्ण और विविधीकृत निवेश रणनीति ही इस समय सबसे बेहतर उपाय है।
