पंजाब में सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने और महिलाओं व बच्चों को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वर्ष 2022 से 2026 के बीच विभाग के माध्यम से कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की गई हैं।
सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मदद के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का दायरा बढ़ाया है। इस अवधि में लगभग 5.2 लाख नए लोगों को पेंशन योजना में शामिल किया गया है। इसके साथ ही करीब 35.7 लाख बुजुर्गों, विधवा और बेसहारा महिलाओं तथा दिव्यांग व्यक्तियों को 23,102 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पेंशन के रूप में दी गई है।
पेंशन व्यवस्था में पारदर्शिता
सरकार ने पेंशन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए रिकॉर्ड की व्यापक जांच भी करवाई। जांच के दौरान 1.9 लाख से अधिक ऐसे मामलों की पहचान हुई, जिनमें पेंशनधारियों की मृत्यु हो चुकी थी या वे पात्र नहीं थे। इन नामों को रिकॉर्ड से हटाकर सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका गया।
इस कदम से सरकार को हर साल करीब 350 करोड़ रुपये की बचत होने लगी है। इसके अलावा उन बैंक खातों की भी पहचान की गई, जिनमें मृत या अयोग्य व्यक्तियों के नाम पर पेंशन जमा हो रही थी। ऐसे खातों में जमा करीब 450 करोड़ रुपये की राशि को जनकल्याण योजनाओं में उपयोग के लिए लाया गया।
बुजुर्गों के लिए विशेष अभियान
राज्य में बुजुर्गों की देखभाल के लिए “साडे बुजुर्ग साडा मान” अभियान भी चलाया गया। इसके तहत 20,000 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न सेवाओं के लिए पंजीकृत किया गया। शिविरों में मुफ्त स्वास्थ्य जांच, चश्मे का वितरण, वरिष्ठ नागरिक कार्ड और पेंशन से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
मानसा में 9.12 करोड़ रुपये की लागत से 72 बिस्तरों वाला सरकारी वृद्धाश्रम भी बनाया गया है। इसके अलावा 14 जिलों में वृद्धाश्रम चलाने वाले गैर-सरकारी संगठनों को लगभग 7 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।
महिलाओं के लिए नई सुविधाएं
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। मुफ्त बस यात्रा योजना के तहत हर महीने करीब 1.20 करोड़ यात्राएं महिलाओं द्वारा की जा रही हैं। इस योजना पर अब तक 2,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
कामकाजी महिलाओं के लिए मोहाली, जालंधर और अमृतसर में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से पांच वर्किंग वूमेन हॉस्टल बनाए जा रहे हैं। इन हॉस्टलों में क्रेच की सुविधा भी होगी, जिससे महिलाएं अपने बच्चों की देखभाल के साथ नौकरी भी कर सकेंगी।
बच्चों और आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूती
बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए राज्य में आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पिछले चार वर्षों में लगभग 4,400 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती की गई है और 6,100 से अधिक पदों की भर्ती प्रक्रिया जारी है।
सरकार ने “नई दिशा योजना” के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों में महिलाओं को हर महीने मुफ्त सैनिटरी पैड भी उपलब्ध कराए हैं। अब तक 13.65 लाख महिलाओं को 7.37 करोड़ सैनिटरी पैड वितरित किए जा चुके हैं।
बाल संरक्षण और कल्याण पर ध्यान
बाल संरक्षण के लिए “प्रोजेक्ट जीवनजोत” के तहत 1,027 बच्चों को भीख मांगने और शोषण से बचाया गया। इनमें से कई बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया गया, जबकि अन्य को संरक्षण गृहों में रखा गया।
इसके अलावा बाल विवाह के खिलाफ भी कार्रवाई की गई और चार वर्षों में सामने आए 165 मामलों में से 150 को तुरंत रोक दिया गया।
सरकार ने गरीब बच्चों के लिए स्पॉन्सरशिप योजना के तहत 11,000 से अधिक बच्चों को हर महीने 4,000 रुपये की सहायता देना भी शुरू किया है। साथ ही 16 नई सरकारी गोद लेने वाली एजेंसियां स्थापित की गई हैं, जिनकी मदद से कई बच्चों को नए परिवार मिले हैं।
समावेशी विकास का लक्ष्य
इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों तक सहायता पहुंचाना और उन्हें बेहतर जीवन के अवसर देना है। पंजाब सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में हर जरूरतमंद व्यक्ति तक सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे।
