ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ तेज गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क ने एशेज सीरीज में एक बड़ा कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है। पर्थ में खेले जा रहे एशेज 2025-26 के पहले टेस्ट की पहली पारी में 7 विकेट झटककर उन्होंने न सिर्फ इंग्लैंड की कमर तोड़ दी, बल्कि एशेज में अपने 100 विकेट भी पूरे कर लिए। स्टार्क ने यह उपलब्धि 23 टेस्ट और 43 पारियों में हासिल की है।
इस फ़तह के साथ स्टार्क ने टेस्ट क्रिकेट में वेस्टइंडीज के दिग्गज गेंदबाज़ कर्टली एम्ब्रोस को भी पीछे छोड़ दिया है। एम्ब्रोस के नाम 98 टेस्ट में कुल 405 विकेट दर्ज हैं, जबकि स्टार्क अब उनसे ऊपर पहुंच चुके हैं और लगातार अपनी उपलब्धियों में इज़ाफ़ा कर रहे हैं।
पर्थ टेस्ट में इंग्लैंड की पारी 172 पर ढही
इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी चुनी, लेकिन यह फैसला टीम के लिए भारी पड़ गया। मैच की छठी गेंद पर ही जैक क्रॉली बिना खाता खोले आउट हो गए। स्कोरबोर्ड पर रन शून्य थे और इंग्लैंड को शुरुआती झटका मिल चुका था।
इसके बाद ओली पोप और बेन डकेट ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 33 रनों की साझेदारी की, लेकिन डकेट 21 रन बनाकर आउट हो गए। इंग्लैंड का स्कोर इस समय 39/3 हो चुका था।
ओली पोप ने काफी संघर्ष किया और 58 गेंदों में 46 रन बनाए। उन्होंने हैरी ब्रूक के साथ मिलकर टीम को 100 के करीब पहुंचाया। ब्रूक ने भी जिम्मेदारी निभाई और अपनी पारी में 52 रन ठोके, जिसमें एक शानदार छक्का और पांच चौके शामिल थे।
जेमी स्मिथ ने भी ब्रूक के साथ 45 रन की साझेदारी की, लेकिन इंग्लैंड की पारी ज़्यादा देर टिक न सकी और पूरी टीम 32.5 ओवर में 172 रन पर ऑल-आउट हो गई।
स्टार्क की घातक गेंदबाज़ी – 58 रन देकर 7 विकेट
ऑस्ट्रेलिया की ओर से गेंदबाज़ी का पूरा शो मिचेल स्टार्क ने ही किया। उन्होंने 58 रन देकर 7 विकेट चटकाए और इंग्लैंड की पूरी बल्लेबाज़ी लाइन-अप को तहस-नहस कर दिया।
कैमरून ग्रीन और ब्रेंडन डोगेट को भी एक-एक विकेट मिला, लेकिन असली कहर स्टार्क की तेज़ गेंदों ने बरपाया।
स्टार्क की उपलब्धि से ऑस्ट्रेलियाई कैंप में खुशी
एशेज में 100 विकेट का आंकड़ा पार करना किसी भी गेंदबाज़ के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। स्टार्क की यह उपलब्धि ऑस्ट्रेलिया के लिए काफी अहम है, क्योंकि वे इस समय बेहतरीन लय में दिख रहे हैं। विकेट की रफ़्तार और स्विंग से उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज़ों में से एक हैं।
पर्थ टेस्ट में उनका धमाकेदार प्रदर्शन आने वाले मुकाबलों के लिए भी इंग्लैंड पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाएगा।
