खाड़ी देशों में काम के बहाने भेजी जा रही भारतीय और पंजाबी लड़कियों के शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसा ही एक मामला फिर सामने आया है, जिसमें पंजाब के मोगा जिले की एक युवती इराक की दर्दनाक ज़िंदगी से निकलकर अब अपने घर लौट आई है। यह सब संभव हुआ राज्यसभा सांसद और समाजसेवी संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों से।
संत सीचेवाल को युवती का धन्यवाद
पीड़िता ने पंजाब लौटने के बाद निरमल कुटिया, सुल्तानपुर लोधी पहुंचकर संत सीचेवाल का आभार जताया। उसने कहा कि अगर संत सीचेवाल मदद न करते, तो शायद वह कभी घर नहीं लौट पाती। युवती ने बताया कि जगराों के एक ट्रैवल एजेंट ने उसे अच्छे वेतन और सिलाई के काम का झांसा देकर इराक भेजा था।
नौकरी का झांसा, गुलामी की हकीकत
पीड़िता ने बताया कि 8 जनवरी 2024 को वह पहले दुबई और फिर इराक ले जाई गई। वहां पहुंचने के बाद सच्चाई सामने आई — उसे सिलेाई का काम नहीं बल्कि घरेलू नौकरानी बना दिया गया।
घर का मालिक उस पर बुरी नजर रखता था और आए दिन उसे ताने और धमकियां देता था। जब उसने इसका विरोध किया, तो उस पर अत्याचार और बढ़ गए।
हिम्मत दिखाई, बनाई वीडियो और मांगी मदद
लड़की ने हिम्मत जुटाकर आरोपी की वीडियो रिकॉर्ड की और पुलिस को शिकायत भेजी। लेकिन इसके बाद उसके साथ निर्दयतापूर्वक मारपीट की गई।
उसने रोते हुए बताया — “मुझे तब तक पीटा गया जब तक डंडा टूट नहीं गया।” इस घटना के बाद वह दो महीनों तक डिप्रेशन में रही।
सोशल मीडिया बना सहारा
लड़की ने 10 अगस्त 2025 को सोशल मीडिया के ज़रिए संत सीचेवाल से संपर्क किया। उन्होंने तुरंत विदेश मंत्रालय से बात की और प्रयास शुरू करवाए। नतीजतन 28 सितंबर को वह सुरक्षित भारत वापस आ गई।
वापसी के बाद भी वह कई दिनों तक सदमे में रही और कहा — “इराक में बिताए वे दिन कभी नहीं भूल सकती।”
सीचेवाल का संदेश – हिम्मत न हारें बेटियां
राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने इस मामले को “हिम्मत और जागरूकता की मिसाल” बताया। उन्होंने कहा, “यह बेटी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो विदेशों में फंसी हैं। उन्हें डरने की नहीं, अपनी आवाज़ उठाने की ज़रूरत है।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे फर्जी ट्रैवल रैकेट्स पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि कोई और बेटी इस नर्क जैसी स्थिति में न फंसे।
यह कहानी सिर्फ एक लड़की की नहीं, बल्कि उन तमाम भारतीय बेटियों की है जो बेहतर भविष्य के सपने लेकर परदेस जाती हैं और शोषण का शिकार बन जाती हैं।
अब समय आ गया है कि सरकार और समाज मिलकर ऐसे गिरोहों पर नकेल कसें और बेटियों को सुरक्षित जीवन देने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
