ट्रेड टैरिफ को लेकर पिछले कुछ समय से भारत और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब कम होता दिख रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की थी कि वे भारत के साथ नई ट्रेड डील करने जा रहे हैं।
अब इसी बीच दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है।
भारत-अमेरिका ने किया 10 साल का रक्षा समझौता
शुक्रवार (31 अक्टूबर) को भारत और अमेरिका ने 10 सालों के लिए रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को नई दिशा देगा और रणनीतिक तालमेल को और मजबूत करेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने एक्स हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए बताया,
“मेरी अमेरिकी समकक्ष पीटर हेगसेथ के साथ कुआलालंपुर में सार्थक बातचीत हुई।
हमने भारत-अमेरिका मेजर डिफेंस पार्टनरशिप के लिए 10 साल की रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह हमारे मजबूत रक्षा संबंधों को एक नए युग में ले जाएगा।”
रक्षा तकनीक और रणनीतिक साझेदारी में बड़ा कदम
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह समझौता भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के पूरे ढांचे को नीतिगत दिशा देगा।
इससे न केवल सैन्य तकनीक और सुरक्षा साझेदारी मजबूत होगी, बल्कि दोनों देशों के बीच रक्षा निर्माण और अनुसंधान में भी सहयोग बढ़ेगा।
माना जा रहा है कि इस साझेदारी के तहत भारत को अमेरिका से एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी और रक्षा उपकरणों तक आसान पहुंच मिलेगी।
मलेशिया दौरे पर कई देशों से मुलाकात
राजनाथ सिंह इस समय मलेशिया दौरे पर हैं, जहां उन्होंने कई देशों के रक्षा मंत्रियों से मुलाकात की।
वे वहां आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय रक्षा सम्मेलन में भी शामिल हुए।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस सम्मेलन की अध्यक्षता मलेशिया ने की, जिसमें आसियान देशों के सभी रक्षा मंत्री मौजूद थे।
बैठक का उद्देश्य भारत और आसियान देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत बनाना था।
अमेरिका-भारत रिश्तों में नई मजबूती
अमेरिका के साथ हुए इस नए समझौते से भारत की रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।
पिछले कुछ सालों में अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ा है —
चाहे वह QUAD समूह, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, या रक्षा तकनीक का आदान-प्रदान ही क्यों न हो।
एक समय पाकिस्तान के करीब गए अमेरिका ने अब भारत के साथ मजबूत साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
नया दशक, नई रक्षा दिशा
यह 10 साल का समझौता न सिर्फ भारत-अमेरिका रिश्तों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि आने वाले दशक में
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को भी और सशक्त बनाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए रणनीतिक स्थिरता और तकनीकी सहयोग का नया अध्याय खोलेगा।
