प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मालदीव यात्रा के दौरान भारत ने मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। यह सहायता एक नए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत दी गई है, जो भारत-मालदीव के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होगी। इस लोन के ज़रिए मालदीव को विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए आवश्यक फंड उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता और विकास को बल मिलेगा।
सैन्य सहयोग: 72 वाहन और रक्षा समर्थन
भारत ने मालदीव को 72 सैन्य वाहन और सुरक्षा से जुड़ा उपकरण भी मुहैया कराया है। यह सैन्य सहायता द्वीप राष्ट्र की सुरक्षा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से दी गई है। रक्षा सहयोग दोनों देशों के बीच सुरक्षा और सामरिक क्षेत्र में मजबूत भागीदारी का प्रतीक है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
भारत-मालदीव मुक्त व्यापार समझौते की शुरुआत
दोनों देशों ने India-Maldives Free Trade Agreement (IMFTA) पर बातचीत की शुरुआत भी की है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत और मालदीव के बीच व्यापार में टैरिफ रियायतें, निवेश अवसर और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। मालदीव के उत्पादों को भारतीय बाज़ार तक पहुंच मिलने से वहां के स्थानीय उद्योगों को बल मिलेगा, वहीं भारत के उत्पाद भी मालदीव में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।
भारत-मालदीव रिश्तों की 60वीं वर्षगांठ पर स्मारक डाक टिकट जारी
राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दोनों देशों ने मिलकर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है। यह डाक टिकट दोनों देशों के ऐतिहासिक और गहरे संबंधों को दर्शाता है। यह पहल ना केवल बीते सहयोग की याद दिलाती है, बल्कि भविष्य की भागीदारी को भी प्रोत्साहन देती है।
पीएम मोदी ने भारत-मालदीव संबंधों पर क्या कहा
प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत, मालदीव का सबसे निकटतम और भरोसेमंद पड़ोसी है। मालदीव न केवल हमारी नेबरहुड फर्स्ट नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह हमारे सागर (SAGAR) दृष्टिकोण में भी एक अहम स्थान रखता है।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत को गर्व है कि वह हर संकट की घड़ी में मालदीव के साथ सबसे पहले खड़ा रहा है — चाहे प्राकृतिक आपदाएं हों या वैश्विक महामारी, भारत ने हमेशा पहले प्रतिक्रियाकर्ता (First Responder) की भूमिका निभाई है। भारत ने जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति से लेकर कोविड-19 के बाद आर्थिक पुनर्निर्माण तक, मालदीव के साथ मिलकर कार्य किया है।
प्रधानमंत्री की इस यात्रा के बाद भारत और मालदीव के संबंधों में नई ऊर्जा और विश्वास आया है। आने वाले समय में आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक सहयोग के और भी क्षेत्र खुल सकते हैं। इस यात्रा ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और साझेदारी को प्राथमिकता देता है।
